उनका वाहन 22 लीटर डीजल ले जाने के लिए अधिकृत था और कागजात पहले उनके पास उपलब्ध नहीं थे। डीजल परिवहन करना पूरी तरह से उनके अधिकार में है। राज्य केपास ऐसा कोई तथ्य या प्रमाण नहीं है जो उनके खिलाफ है। सरकारी अधिवक्ता ने भी इस बात को माना कि पेट्रोलियम नियम 1976 के नियम निरस्त हो गए हैं और नए नियम लागू हो गए हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने याचियों की गिरफ्तारी पर 11 अगस्त तक रोक लगाते हुए यूपी सरकार से जवाब तलब किया है।