थाने के मालखाने से चुराकर शराब बेचे जाने के मामले में प्रभारियों की भी भूमिका की जांच शुरू हो गई है। दरअसल जांच में सामने आया है कि शराब बेचने का यह खेल एक-दो दिन नहीं बल्कि कई महीनों से चल रहा था। ऐसे में प्रभारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। उधर नामजद पुलिसकर्मियों पर दर्ज केस में भ्रष्टाचार अधिनियम की भी धारा बढ़ा दी गई है।
मामला 10 अप्रैल को तब खुला था जब सोरांव के रैया गांव से पूर्व प्रधान जियालाल निर्मल व दारा सिंह को शराब संग पकड़ा गया। उन्होंने ही बताया था कि बरामद शराब सोरांव थाने के मालखाने की है, जिसे चुराकर सिपाही राजकुमार व मालखाना प्रभारी दीवान विजयबहादुर उन्हें उपलब्ध कराई थी। मामले में राजकुमार गिरफ्तार कर लिया गया जबकि दीवान अब भी फरार है। जांच में पता चला कि पिछले साल पकड़ी गई 546 पेटी अवैध शराब में से 116 पेटियां गायब थीं। आरोपियों से पूछताछ में यह भी बात सामने आई कि शराब चोरी कर बेचने का यह खेल काफी समय से चल रहा था। ऐसे में प्रभारियों की भी भूमिका की जांच शुरू हो गई है। दरअसल सवाल उठ रहे हैं कि लंबे समय से खेल चलने के बावजूद आखिर थाना प्रभारियों को इसकी भनक कैसे नहीं लगी। उधर, आरोपी पुलिसकर्मियों पर दर्ज केस में भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा भी बढ़ा दी गई है। जिसके बाद मामले की विवेचना सीओ को ट्रांसफर हो गई है। सीओ सोरांव अशोक वैंकट का कहना है कि मामले में प्रभारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आरोपी दीवान का पता नहीं लग सका है। उसकी तलाश में टीमें लगाई गई हैं।