फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस बार 280 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलेगा गन्ना मूल्य

Wed, 27 May 2015 11:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
भीषण गर्मी से तप रहे प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए यह राहत भरी खबर है। इस वर्ष उनको गन्ना मूल्य का भुगतान 280 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मिलेगा। इससे पूर्व 240 रुपये क्विंटल की दर से भुगतान होता था जबकि घोषित मूल्य 280 रुपये ही था। इतना ही नहीं इस वर्ष के बकाया कुल गन्ना मूल्या का 75 फीसदी हिस्सा 15 जुलाई तक मिल जाने की उम्मीद है। बुधवार को हाईकोर्ट ने एक बार फिर चीनी मिलों के लिए कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिए हैं।
विज्ञापन

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की पीठ ने इस बात पर नाराजगी भी जताई कि कब तक कोर्ट के आदेश से किसानों को भुगतान होता रहेगा। संगठन के संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि अदालत के हस्तक्षेप से ही गन्ना किसानोें को पिछले वर्ष के बकाया का भुगतान हो सका है। इस वर्ष 2014-15 का निजी चीनी मिलों पर 6882.19 करोड़ रुपये बकाया है। सहकारी मिलों पर भी 1.931 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है।

अदालत ने आदेश दिया कि 15 जून, 30 जून और 15 जुलाई तक 25-25 फीसदी की दर से कुल 75 फीसदी रकम का भुगतान कर दिया जाए। शेष बकाए के संबंध में 28 जुलाई को अदालत विचार करेगी। प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि यदि मिलें भुगतान करने में नाकाम रहती हैं तो वह उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे। चीनी मिलों द्वारा इसका प्रतिवाद किया गया कि मिलों के पास किसानों के भुगतान के लिए रकम नहीं है। मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने कहा कि सरकार मिलों को अनुदान देने पर विचार कर रही है। इसके लिए जून में बैठक बुलाई गई है। यदि अनुदान मिल जाता है तो किसानों को पूरा भुगतान हो जाएगा। कोर्ट ने कहा कि अनुदान पर निर्णय लेना सरकार का काम है मगर गन्ना किसानों को 15 जून तक पहली किस्त 25 फीसदी का भुगतान हर हालत में हो जाना चाहिए। वीएम सिंह ने 280 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि दर घोषित होने के बाद भी किसानों को 240 रुपये का ही भुगतान मिल पा रहा है। प्राइवेट मिलें इसी दर से 6016.78 करोड़ बकाये की बात कह रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें