इलाहाबाद। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर लड़े गए कारगिल युद्ध को फतह करने वालों में देश के सपूतों के साथ संगम नगरी के लालमणि यादव भी शामिल थे जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना पाकिस्तानी सैनिकों के छक्के छुड़ा दिए थे। लालमणि उस वक्त तुरतुक सेक्टर के हनीफ चौकी पर दुश्मनों से मोर्चा ले रहे थे। शाम का वक्त था। पाकिस्तान की ओर से लगातार गोलाबारी जारी थी। अचानक उनके सिर पर एक गोला आकर गिरा और वह बुरी तरह से घायल हो गए। बाद में उन्हें कारगिल बेस हॉस्पिटल ले जाया गया जहां वह वीरगति को प्राप्त हुए।
करछना तहसील के पतुलुकी पनासा गांव के नायक लालमणि यादव (जन्म 16 जुलाई 1963) 13 कुमाऊं रेजीमेंट में शामिल थे। कारगिल युद्ध शुरू होने के 14 महीने पहले ही वह घर आए थे। कारगिल युद्ध से पहले भी घर आने की तैयारी थी लेकिन कारगिल में घुसपैठ की सूचना के साथ ही अन्य जवानों के साथ उनकी भी छुट्टी रद कर दी गई और उन्हें कश्मीर भेज दिया गया। युद्ध की सूचनाएं रेडिया, अखबार और टीवी के माध्यम से आ रही थीं। उन्हें रेजिमेंट के साथ तुरतुक सेक्टर भेजा गया।
घटना का जिक्र करते हुए पत्नी संतोषा देवी की आंखें भर आईं। बोलीं, वहां लगातार कई दिनों से गोलाबारी चल रही थी। वह सबसे ऊंचाई वाले हिस्से पर थे। कई दिनों के युद्द के दौरान उन्होंने 13 पाकिस्तानियों को निशाने पर लिया था। एक दिन शाम को अचानक गोलाबारी शुरू हो गई। इसी में एक गोला उनके सिर पर आ गिरा जिसमें वह बुरी तरह से चोटिल हो गए और फिर शहीद। हालांकि उनके शहीद होने की सूचना एक दिन बाद आई थी। लालमणि के बचपन के साथी रणजीत सोनकर कहते हैं, उनमें देशभक्ति का जज्बा था। वह हमेशा देश के लिए बलिदान की बात करते थे, जिसे उन्होंने पूरा कर दिखाया।
कारगिल में शहीद होने वालों में हवलदार कंचन सिंह का नाम भी शामिल है। मूलत: फतेहपुर के रहने वाले कंचन का परिवार प्रीतमनगर में रहता है। उनकी पत्नी कृष्णा देवी कहती हैं, उनका पार्थिव शरीर यहां सात अगस्त को लाया गया था। सूबेदार श्याम सुंदर सिंह पटेल के मुताबिक कारगिल में सूबेदार पीएन ओझा, हवलदार राम सुंदर यादव, हवलदार आईजे राय, एके तिवारी समेत इलाहाबाद के दर्जन भर अन्य जवानों ने भी बखूबी अपनी भूमिका का निर्वाह किया।
विजय दिवस पर कई कार्यक्रम आज
इलाहाबाद। कारगिल विजय दिवस पर मंगलवार को आर्मी के अतिरिक्त कई अन्य स्थानों पर भी कार्यक्रम होंगे। यूपी-एमबी सब एरिया में सबएरिया से जुड़े शहीदों की पत्नियों को सम्मानित किया जाएगा, वहीं नायक लालमणि यादव के गांव में कांशीराम महाविद्यालय प्रबंधन समिति की ओर से विजय दिवस मनाया जाएगा। वीर सेनानी पूर्व सैनिक कल्याण समिति की ओर से सिविल लाइंस स्थित शहीद वाल पर सुबह 11 बजे श्रद्धांजलि दी जाएगी।