इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन की सुस्त कार्यशैली और वित्तीय अनियमितता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यूजीसी के लगातार दबाव के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन दसवीं पंचवर्षीय योजना के बजट की रिपोर्ट नहीं दे पाया है। इसकी वजह से यूजीसी ने विश्वविद्यालय के बजट में सात करोड़ रुपये की कटौती कर दी है।
अभी बारहवीं पंचवर्षीय योजना चल रही है। इस तरह से विश्वविद्यालय को दसवीं पंचवर्षीय योजना की रिपोर्ट आठ-नौ साल पहले ही देनी थी लेकिन अभी तक खर्च का हिसाब विश्वविद्यालय नहीं दे पाया। इस बाबत यूजीसी में विश्वविद्यालय के अफसराें की कई बार पेशी हुई लेकिन कई मद में हुए खर्च का हिसाब ही विश्वविद्यालय नहीं दे पा रहा था। इनके डाक्यूमेंट ही विश्वविद्यालय के पास नहीं हैं। इसकी वजह से यूजीसी ने बजट में सात करोड़ रुपये की कटौती कर दी है। इतना ही नहीं आगे भी इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। हालांकि लेखा विभाग के अफसरों का कहना है कि बजट में कटौती का इस रिपोर्ट से कोई संबंध नहीं है। प्लान के पदों पर नियुक्ति नहीं होने की वजह से वेतन का पैसा वापस ले लिया गया है।