गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने लगा है। प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया है। बाढ़ चौकियां तैयार हैं। बाढ़ प्रभावित संभावित क्षेत्राें में लोगों को जागरूक करने के लिए टीमें लगा दी गईं हैं।
कछारी इलाकों की बस्तियों में रहने वालों पर खतरा अधिक है। हालांकि, दोनों ही नदियां अभी खतरे के स्तर 84.734 मीटर से काफी नीचे बह रहीं हैं। शनिवार रात आठ बजे तक यमुना का जलस्तर 18 सेमी प्रति घंटे, फाफामऊ में गंगा का जलस्तर एक सेमी प्रति घंटा और छतनाग में गंगा का जलस्तर पांच सेमी प्रति घंटे की दर से बढ़ रहा था।
रात आठ बजे तक यमुना का जलस्तर 71.90 मीटर, फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 76.27 मीटर व छतनाग में 71.16 मीटर था। वहीं, सुबह आठ बजे तक गंगा का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा था। यमुना का जलस्तर 18 सेमी प्रति घंटे और गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 12 सेमी व छातनाग में 22 सेमी प्रति घंटे की दर से बढ़ रहा था। 12 घंटे बाद शाम आठ बजे तक गंगा का जलस्तर बढ़ने की गति धीमी पड़ गई।
हालांकि, जलस्तर लगातार बढ़ रहा है सो प्रशासन बाढ़ राहत कार्य की तैयारियों में जुट गया है। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बक्शी बांध, मोरी गेट, मम्फोर्डगंज एसटीपी सहित सभी स्थानों पर पंपिंग स्टेशनों क्रियाशील रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बाढ़ के समय स्लूज गेटों के बंद होने पर पानी की निकासी के लिए पंपों की क्रियाशीलता की जांच कराते हुए उनको क्रियाशील बनाए जाने के निर्देश दिए हैं।
नाविकों को नई जगह बांधने पड़ रहे खूंटे
संगम नोज पर मौजूद नाविक अनिल निषाद अजीत निषाद, निरंजन निषाद और गोविंद निषाद ने बताया कि नदियों का जलस्तर बढ़ने का अहसास नाव चलाने के दौरान भी हो रहा है। साथ ही अब नदी किनारे नाव के खूंटे नई जगह बांधने पड़ रहे हैं। नाविकों के मुताबिक इस दौरान पर्यटक भी खूब आने लगते हैं।
वर्जन
‘संभावित बाढ़ के मद्देनजर सभी आवश्यक तैयारियां 15 जुलाई के पूर्व ही पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमों को सक्रिय रहने को कहा गया है। वहीं, स्वास्थ्य, नगर निगम, सिंचाई व अन्य संबंधित विभागों को अपनी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारी