राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत मोती लाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय (कॉल्विन) परिसर में पांच साल से बनकर तैयार 42 बेड का पीडियाट्रिक वार्ड अब तक शुरू नहीं हो सका है। कीमती उपकरण अस्पताल में रखे धूल फांक रहे हैं। कुछ उपकरणों के खराब होने का डर है। यहां बच्चों के भर्ती होने की कोई व्यवस्था नहीं है।
लखनऊ की आईसीआरपी संस्था ने करीब 70 लाख रुपये की लागत से इस वार्ड का निर्माण कराया था। 12 बेड के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) और 30 बेड के सामान्य वार्ड के लिए चार डॉक्टर, 30 नर्स, छह वार्ड बॉय, तीन लैब टेक्नीशियन, चार फार्मासिस्ट, दो स्वीपर और चार सुरक्षा कर्मियों की तैनाती होनी हैं। शासन को कई बार पत्र लिखा जा चुका है लेकिन तैनाती नहीं हो रही है।
करीब तीन साल पहले पीडियाट्रिक वार्ड में इस्तेमाल होने वाले 12 वेंटिलेटर, छह पैरा मॉनीटर, फोटो थेरेपी मशीन, 12 वार्मर, 12 आईसीयू व 30 सामान्य बेड कॉल्विन अस्पताल को उपलब्ध करा दिए गए थे। इन उपकरणों की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये है। इन्हें कॉल्विन अस्पताल परिसर की नई बिल्डिंग में स्थित पालना घर में रखा गया है। उपकरणों पर धूल की मोटी परत जम गई है।
मौजूदा सुविधाओं पर दबाव
शहर में गंभीर बच्चों के लिए सीमित सुविधाएं उपलब्ध हैं। सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय में 25 पीडियाट्रिक आईसीयू बेड हैं। जिला महिला चिकित्सालय में स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) के 18 बेड हैं। चिल्ड्रेन अस्पताल पर प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर, भदोही, मिर्जापुर और जौनपुर समेत कई जिलों के मरीजों का दबाव है। यहां नवजात शिशुओं को भर्ती करने में काफी कठिनाई होती है। (कॉल्विन) का 42 बेड का पीडियाट्रिक वार्ड चालू होने से बड़ी राहत की उम्मीद थी लेकिन यह पांच साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी।
पीडियाट्रिक वार्ड शुरू करने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही वार्ड को संचालित कर दिया जाएगा। उपकरणों को पालना घर में सुरक्षित रखा गया है। सभी उपकरण क्रियाशील हैं। -डॉ. एसके चौधरी, प्रमुख अधीक्षक, कॉल्विन अस्पताल