इलाहाबाद। पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के गांव बटेश्वर में रहने वाले लोगों को अभी यात्री ट्रेन का इंतजार करना होगा। पूर्व की एनडीए सरकार के दौरान इटावा-शमासाबाद-बटेश्वर-आगरा के बीच रेल लाइन बिछाने का जो काम शुरू हुआ था वह सालों बाद अब पूरा तो हो गया है, लेकिन इस नए ट्रैक पर अभी किसी भी यात्री ट्रेन को चलाने की मंजूरी नहीं मिली है। रेलवे अभी इस रूट पर सिर्फ मालगाड़ी चलाने जा रहा है। इसकी शुरूआत सोमवार से होने जा रही है। उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है।
अटल के प्रधानमंत्री रहने के दौरान ही इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी, लेकिन यह काम बेहद धीमी गति से चला। जमीन संबंधी विवाद के कारण यूपीए सरकार में यह काम कुछ अटका भी। इस बीच केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद पूर्व पीएम के गांव को रेल से जोड़ने का काम तेजी से चला। अब यह काम पूरा हो चुका है। इतना ही नहीं सिगनलिंग विभाग ने भी यहां सब कुछ ओके कर दिया है।
इतना सब कुछ होने के बाद भी रेलवे यहां अभी सिर्फ मालगाड़ी ही सोमवार से चलाने जा रहा है, जबकि स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि इस रूट पर यात्री ट्रेन भी इसी माह से चलनी शुरू हो जाएगी। रेलवे अफसरों का कहना है कि अगर कहीं कोई नया रूट बनता है तो वहां पहले मालगाड़ी ही चलाई जाती है। इसके बाद सीआरएस का निरीक्षण होता है। उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही संबंधित रूट पर यात्री ट्रेन चलती है। बता दें कि इस रूट पर कुल 12 छोटे रेलवे स्टेशन/हॉल्ट बनाए गए हैं। इसमें मुख्य रूप से भांडई, शमासाबाद, फतेहाबाद, बाह, बटेश्वर आदि शामिल हैं। रूट में कुल 40 रोड क्रासिंग है।
‘इस नए रूट पर सिगनलिंग आदि का काम पूरा हो गया है। अभी इसमें सिर्फ मालगाड़ी ही चलाई जाएगी।’ भूपिंदर ढिल्लन (पीआरओ, आगरा डिवीजन, एनसीआर)
इटावा-फतेहाबाद-आगरा के बीच यात्री ट्रेन संचालन होने के बाद इलाहाबाद से आगरा की दूरी थोड़ी कम हो जाएगी। वर्तमान समय इलाहाबाद जंक्शन से आगरा कैंट की कुल दूरी 450 किलोमीटर है। अगर इस नए रेल खंड की बात करें तो इटावा से फतेहाबाद होकर आगरा की दूरी 109 किलोमीटर है। जबकि इटावा से टूंडला होकर आगरा की कुल दूरी 118 किलोमीटर है। इतना ही नहीं इलाहाबाद मंडल के टूंडला जंक्शन में ट्रेनों की भारी आवाजाही के चलते अक्सर आगरा जाने वाली ट्रेनें लेट हो जाती हैं, लेकिन इस रूट पर यात्री ट्रेनें शुरू होने के बाद रेलवे केे पास विकल्प रहेगा कि वह फतेहाबाद होकर ट्रेनें चला दें।