इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालत परिसर में वकीलों के हाथों पिटे पीड़ित की गुहार पर पुलिस से विवेचना की प्रगति रिपोर्ट तलब की है। आरोप है कि पुलिस मामले की विवेचना में हीलाहवाली कर रही है। फिलहाल आरोपी दोनों वकील जेल में हैं। हाईकोर्ट ने पिटाई के ही एक अन्य मामले में इन वकीलों के सूबे की किसी भी अदालत में प्रवेश पर पाबंदी लगा रखी है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति सुरेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने पीड़ित मो. अबरार अहमद की ओर से निष्पक्ष विवेचना की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर यह आदेश दिया है। यह घटना इलाहाबाद जिला अदालत परिसर में हुई थी। मो. अबरार ने 20 मार्च 2024 को कर्नलगंज थाने में अधिवक्ता रणविजय सिंह समेत चार नामजद और चार अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।
इसमें आरोप लगाया था कि जिला न्यायालय में वह और सोनू उर्फ अली अहमद अपने वकील से मिलने उसके चैंबर में पहुंचे थे। इसी दौरान अधिवक्ता रणविजय अपने साथियों के साथ पहुंचे और गाली देते हुए मारपीट करने लगे। जमीन से जुड़े कागजात और तीन हजार रुपये छीन कर धमकी देते हुए भाग गए। इस मामले में पुलिस की भूमिका से नाखुश अबरार ने निष्पक्ष विवेचना की गुहार लगाई है।
हाईकोर्ट में अबरार ने कहा है कि पुलिस विवेचना में हीलाहवाली कर रही है। कोर्ट ने विवेचनाधिकारी से जवाबी हलफनामे के साथ पेश होने का आदेश दिया। इस पर अपर शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि आरोपी अधिवक्ता रणविजय सिंह और उनके साथियों ने जिला अदालत में एक दूसरे मामले की सुनवाई के दौरान वादी मोनिस परवेज, उनकी पत्नी की पिटाई करते हुए सिविल जज से बदसलूकी तक कर चुके हैं।
इनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू हो चुकी है। आरोपी रणविजय सिंह और आसिफ जेल में है। रणविजय पर 12 मामले दर्ज हैं। खंडपीठ ने माे. अबरार के प्रकरण में विवेचनाधिकारी को व्यक्तिगत हलफनामेे के साथ आठ जुलाई को प्रगति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।