विश्व हिन्दू परिषद की ओर से शनिवार को संगम की रेती पर आयोजित हिन्दू सम्मेलन, सामाजिक बदलाव की नई इबारत लिख सकता है। हिन्दुओं की टूट-फूट बचाने और ‘अछूत’ समझी जाने वाली जातियों को भाईचारे के सूत्र में पिरोने के लिए विश्व हिन्दू परिषद ने नया नाम गढ़ा है ‘धर्मयोद्धा’। सम्मेलन में विहिप संरक्षक अशोक सिंहल और केंद्रीय सह संगठन मंत्री विनायक राव ने लोगों से बदलाव का हिस्सा बनने का आह्वान किया।
साथ ही संगठन की ओर से उन्हें सम्मानित करने का फैसला भी किया गया। तर्क दिया कि जिन्हें हम ‘अछूत’ मानते हैं, वे दरअसल सवर्ण जातियां हैं जिन्होंने मुस्लिम आक्रांताओं के डर से धर्म नहीं बदला बल्कि ऐसे कामों को करना मंजूर कर लिए जिनके कारण तत्कालीन समाज ने उन्हें ‘अछूत’ की श्रेणी में रख दिया। कहा गया कि धर्म के लिए सब कुछ सहने और स्वीकार करने वाले ही असली धर्म योद्धा हैं।
परेड मैदान में विहिप के शीर्ष नेताओं ने धर्मांतरण को इतिहास से जोड़ने की कोशिश की। अशोक सिंहल ने कहा कि जिन्हें अछूत कहते हैं उनकी आबादी 18 करोड़ है। पुरानी जनसंख्या के हिसाब से 15 करोड़ मुसलमान और पांच करोड़ क्रिश्चियन हैं। मुस्लिम शासन के पहले देश में कई जातियों का अस्तित्व नहीं था। बहुतों ने तो मुस्लिम धर्म अपना लिया लेकिन जो हारे उन्हें ऐसे कार्य करने के लिए मजबूर किया गया जो समाज में स्वीकार्य नहीं थेा। बाद में इन्हें जाति का नाम दे दिया गया। ऐसी जातियां तिरस्कार नहीं, सम्मान की हकदार हैं। विहिप की ओर से इन्हें सम्मानित किया जाएगा।
श्री सिंहल ने गौ-हत्या, गंगा निर्मलीकरण, अयोध्या, काशी और मथुरा का मुद्दा भी उठाया।
कहा, लंबे आंदोलन के बाद अब राम मंदिर निर्माण की स्थिति में आ गए हैं। इसके पहले विनायक राव ने संगठन की ओर से रक्तदान, नेत्रदान, पर्यावरण की रक्षा के लिए तुलसी पौधा दान की जानकारी दी। सामाजिक बदलाव के तहत जातिवाद और ऊंच-नीच के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने की बात भी कही। सम्मेलन में सांसद श्यामाचरण गुप्त, सांसद केशव प्रसाद मौर्य, सांसद विनोद सोनकर, डॉ.एलएस ओझा, डॉ.नीरज अग्रवाल, रामजी अग्रहरि, राधेश्याम तिवारी, पुनीत वर्मा, विनोद अग्रवाल, शलभ श्रीवास्तव, सुरेश अग्रवाल, आशुतोष, राजन, दिवाकर, अमित आदि मौजूद थे।