हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी मुकदमे में विपक्षी द्वारा जवाब दाखिल न करने और वाद बिंदु तय हुए बिना भी कोर्ट को सिविल वाद तय करने का अधिकार है। मगर ऐसी स्थिति में निर्णय देने से पहले विवादित तथ्यों को साबित करना आवश्यक है। यदि कोर्ट तथ्यों को साबित किए जाने से सहमत है तो वह निर्णय सुना सकती है। यह नहीं कहा जा सकता है कि वाद बिंदु तय किए बिना पारित डिक्री अवैध है। यूपीएसआईडीसी गाजियाबाद की प्रथम अपील खारिज करते हुए न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने यह आदेश दिया।