prayagraj news : जवाहर लाल नेहरू अपनी माता स्वरूपरानी नेहरू के साथ। फाइल फोटो।
- फोटो : prayagraj
मीरगंज के ही तमाम नए-पुराने लोग बादशाही मंडी पुलिस चौकी के करीब 77, मीरगंज वाले मकान को पंडित नेहरू की जन्मस्थली से जोड़ने का दावा करते हैं, जहां आज दशरथ मार्केट बनी हुई है। मार्केट में टंच और स्वर्णकारों की दुकानें हैं। लेकिन, इससे जुड़े तथ्य आधारहीन हैं। ऐसे में दूसरे दावे में ही असर है। शहर की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने वाले बाबा अभय अवस्थी कहते हैं, मोतीलाल नेहरू के मीरगंज वाले घर में आने-जाने वाले उनके मित्र चित्रकार प्रभाकर सिंह मेरे बाबू जी को बताते थे कि मौजूदा लोकनाथ चौराहे के दक्षिण पूर्व एक मुस्लिम रईस का बाग था, जिसमें बने एक खपरैल के मकान में ही शहर के जानेमाने वकील पंडित मोतीलाल नेहरू किराए पर रहते थे।
prayagraj news : लोकनाथ चौराहे के दक्षिणी पूर्वी छोर पर इसी भवन की जगह बने मकान जन्मे थे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू।
- फोटो : prayagraj
इसी मकान की पहली मंजिल के एक कमरे में 14 नवंबर 1889 को पंडित नेहरू का जन्म हुआ था। लेकिन, बाद में राजनीतिक विद्वेष में पंडित नेहरू की जन्मस्थली को 77, मीरगंज वाले मकान से जोड़कर प्रचारित किया जाने लगा, जो सही नहीं है। क्योंकि तब तक नगर निकाय जैसी संस्था ही नहीं थी, ऐेसे में मकान नंबर का सवाल ही नहीं उठता। जवाहरलाल के जन्म के बाद पंडित मोतीलाल नेहरू मीरगंज वाले मकान में तकरीबन छह वर्षों तक रहे और 1895 में स्वराज भवन चले गए। वर्ष 1924 में म्युनिस्पल डेवलपमेंट बोर्ड के अस्तित्व में आने के बाद मीरगंज के उक्त बाग वाले इलाके को अधिगृहीत करके वहां बने मकानों को गिराकर नए सिरे से प्लाटिंग की गई।
prayagraj news : मीरगंज स्थित दशरथ मार्केट वाली जगह को भी पं. जवाहरलाल नेहरू के जन्म स्थान होने का दावा किया जाता है।
- फोटो : prayagraj