इलाहाबाद (ब्यूरो)। देश में बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता, अभिव्यक्ति और जीने की आजादी के विरोध में देश से लेखकों द्वारा वापस किए जा रहे पुरस्कार-सम्मान के समर्थन में शुक्रवार को संगम नगरी में भी छात्र-छात्राओं सहित लेखक, साहित्यकार सड़क पर उतरे। प्र्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ, जन संस्कृति मंच की ओर से उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के गेट पर विरोध प्रदर्शन और हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। इस दौरान सभी ने हाथों में ‘अब अभिव्यक्ति के खतरे उठाने ही होंगे’ जैसे स्लोगन ले रखे थे।
केंद्र निदेशक के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में मांग की गई कि भारतीय सांस्कृतिक बहुलता, विचार और अभिव्यक्ति की आजादी की बहाली और राष्ट्र महत्व की संस्थाओं को सरकारी दखलंदाजी से मुक्त कराने की दिशा में कदम उठाए जाएं। जिससे भारतीय संस्कृति की पहचान धूमिल न पड़े। प्रतिरोध प्रदर्शन में वरिष्ठ कथाकार दूधनाथ सिंह, जियाउल हक, प्रो.राजेंद्र कुमार, प्रणय कृष्ण, प्रो.लाल बहादुर वर्मा, गोपाल रंजन, उर्मिला जैन, प्रो.अनीता गोपेश, रमाशंकर सिंह, सत्यकेतु, ओमप्रकाश, रविकिरन जैन, सुधांशु मालवीय, अली अहमद फातमी, राम प्यारे राय, हरिश्चंद्र पांडेय, रश्मि मालवीय, सूर्य नारायण, प्रो.संतोष भदौरिया, अनिल रंजन भौमिक, इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह, विकास स्वरूप आदि मौजूद थे।