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मंसूर अली पार्क में विरोध का दायरा बढ़ा, भ्रष्टाचार अत्याचार का मुद्दा भी उठा

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the scope of protest increased in mansoor ali park the issue of corruption atrocities also arose - फोटो : CITY DESK
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सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में महिलाओं की शुरू लड़ाई अब अलग रूप अख्तियार करने लगी है। मंसूर अली पार्क में 41 दिनों से जारी धरने में शामिल महिलाओं ने अराजकता, रेप, अत्याचार, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना था कि इन बुराइयों के खात्मे तक यह लड़ाई जारी रहेगी।
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महिलाओं की दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे धरने पर भी नजर रही। शनिवार को भी वार्ताकारों ने शाहीन बाग में आंदोलनरत महिलाओं से वार्ता की। वार्ता विफल रहने के बाद यहां भी जल्द आंदोलन खत्म होता नहीं दिख रहा। मंसूर अली पार्क में धरने पर बैठी महिलाओं ने
भी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा की। सीएए के विरोध में अलग-अलग मोहल्लों से महिलाओं ने जुलूस निकाला और धरने में शामिल हुईं। आंदोलन के समर्थन में अलग-अलग संगठन के प्रतिनिधि भी धरने में शामिल हुए। धरना स्थल पर संबोधन, जोशीले गीतों, नाटक आदि का दौर भी जारी रहा।
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महिलाओं ने इस दौरान नागरिकता संशोधन कानून के अलावा महंगाई, शिक्षा के गिरते स्तर, महंगे इलाज जैसे मुद्दों को लेकर सरकार की नीतियों पर हमला बोला।
धरने में शनिवार को पीयूसीएल की टीम भी शामिल हुई। पीयूसीएल के राष्ट्रीय महासचिव वी.सुरेश, उपाध्यक्ष संजय पारिख, मिहिर देसाई, राष्ट्रीय सचिव रोहित प्रजापति ने आंदोलन को समर्थन देने के साथ सीएए-एनआरसी को संविधान विरोधी बताया। धरने में सारा, सबीहा, सै.मो.अस्करी, इरशाद उल्ला आदि ने विचार रखे।
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