पांच सौ और हजार के नोट बंद होने के बाद जिन लोगों के पास अभी मोटी रकम रखी है, उनका चैन छिन गया है। यह रकम बैंक में जमा करते हैं तो आय का स्रोत बताना होगा। आय का जरिया न बता पाने पर टैक्स के साथ भारी भरकम जुर्माना भरना होगा। अगर बैंक में रकम जमा कर टैक्स और जुर्माना अदा भी कर दिया तो भी ऐसे लोग आगे हमेशा आयकर विभाग के निशाने पर होंगे। रकम न जमा करने पर 30 दिसंबर के बाद वह रद्दी हो जाएगा। इसकी वजह से लोगों के सामने बड़ी दुविधा की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
जानकारों के मुताबिक शहर में कई ऐसे निजी अस्पताल हैं, जिनकी रोज की आय लाखों में हैं। निजी प्रैक्टिस करने वाले कुछ डॉक्टरों का भी यही हाल है, जो एक-एक मरीज से पांच से आठ सौ रुपये तक फीस लेते हैं और सुबह-शाम चार-चार घंटे की प्रैक्टिस में 60 से 80 तक मरीजों को देखते हैं। उस हिसाब से ऐसे डॉक्टरों की रोज की आय करीब 30 से 65 हजार रुपये तक होती हैं। कई व्यापारियों का भी यही हाल है। मुट्ठीगंज, चौक, बहादुरगंज में किराना, तेल, फर्नीचर, कागज, मारबल, सीमेंट, ज्वेलरी आदि के कई कारोबारियों की प्रतिदिन की आय 15 से 20 लाख रुपये हैं। इस लिस्ट में कई बिल्डरों के साथ आर्किटेक्ट, इंजीनियर जैसे पेशेवर भी शामिल हैं।
ऐसे निजी अस्पताल, डॉक्टर, व्यापारी और पेशेवर कुल आय का आधा भी आयकर नहीं अदा करते। नतीजा भारी-मात्रा में नगदी रखे हुए हैं। अब जब पांच सौ और हजार के नोट बंद हुए और अघोषित आय पर सरकार ने टैक्स और जुर्माने का फरमान जारी किया तो ऐसे लोगों की रातों की नींद उड़ी हुई है। कर अधिवक्ता एवं वित्त सलाहकार डॉ.निधि पी सिंह कहती हैं कि अब लोगों के लिए रकम छिपा पाना आसान नहीं है। कैश के रूप में रखी मोटी रकम को आसानी से बदला भी नहीं जा सकता। ऐसे में बैंक में जमा करना ही विकल्प है, वर्ना वह रद्दी ही हो जाएगी।
इलाहाबाद। काली कमाई रखे लोगों ने बैंक में रकम जमा करने के बाद जो लोग आय का स्रोत नहीं बता सके वे और जो लोग बता भी देंगे, उन्हें भी टैक्स के साथ जुर्माना भरना होगा। उदाहरण के लिए नौ नवंबर से 30 दिसंबर के बीच अघोषित 10 लाख रुपये बैंक जमा किए गए तो 30 प्रतिशत टैक्स, यानी तीन लाख रुपये और उस पर तीन प्रतिशत सरचार्ज के रूप में नौ हजार रुपये मिलाकर टैक्स की रकम हुई कुल 3.09 लाख रुपये। शेष रकम पर 200 फीसदी जुर्माना यानी छह लाख रुपये और भरना होगा। वित्त सलाहकार डॉ.पवन जायसवाल के मुताबिक इस हिसाब से टैक्स और जुर्माना मिलाकर कुल रकम हुई 9.09 लाख। यानी 10 लाख रुपये में मात्र 91 हजार रुपये बचेंगे। घोषित रकम जमा करने पर भी जुर्माना भरना होगा। ऐसी स्थिति में रकम अगर 10 लाख रुपये है तो तीन लाख रुपये टैक्स और डेढ़ लाख रुपये जुर्माना भरना होगा।
वार्षिक सूचना रिटर्न (एआईआर) में आयकर विभाग बैंकों से पाई-पाई का हिसाब लेगा। आमतौर पर बैंक मार्च तक मई तक विभाग को देते थे लेकिन नोट बंदी के बाद अब बैंकों को एआईआर 31 दिसंबर तक देना होगा। जिन लोगों के बजट खातों में एकमुश्त 50 हजार से ज्यादा, चालू खातों में 2.50 लाख से ज्यादा तथा नौ नवंबर से 30 दिसंबर के बीच दोनों तरह के खातों में क्रमश: 2.50 लाख और 12.50 लाख से अधिक रकम जमा हुई है उनके पैन, नाम, पता सहित पूरा ब्योरा आयकर विभाग को देना होगा। इसके बाद टैक्स और जुर्माना वसूली की कार्रवाई होगी।