प्रदेश में 103 पद क्लर्कों के भी भरे जाएंगे।
सभी भर्ती आयोगों में इंटरव्यू और भर्तियों पर रोक लगाने के बाद अब उत्तर प्रदेश अधीनस्थ चयन आयोग पर भी गाज गिर सकती है। आशंका जताई जा रही है कि नई सरकार आयोग को भंग कर सकती है। हालांकि इस बाबत सरकार ने अभी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है। इसके अलावा जहां इंटरव्यू और भर्तियों पर रोक लगाई गई हैं, वहां भी सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने पिछले दिनों इंटरव्यू दिए हैं, जो दे रहे थे और जिन्हें इंटरव्यू में शामिल होना था, वे सभी अब असमंजस की स्थिति में और परेशान हैं।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भर्ती आयोगों में इंटरव्यू रोकने के लिए अभियान चल पड़ा है। हफ्ते भर के भीतर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद में इंटरव्यू और हजारों भर्तियां रोकी जा चुकी हैं। प्रदेश भर के अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं और भर्ती आयोगों एवं अन्य संबंधित संस्थानों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कहीं से कोई जवाब नहीं मिल रहा है। संबंधित संस्थानों के अफसरों ने भी चुप्पी साध रखी है। सभी को अब सरकार से अगला निर्देश मिलने का इंतजार है लेकिन अफसरों से मिलने पहुंच रहे अभ्यर्थी यही सवाल कर रहे हैं कि इस पूरे मामले में उनका क्या दोष। उन्होंने तो पूरी मेहनत से पढ़ाई की और सफलता अर्जित की। जांच करानी है तो पुरानी भर्तियों की कराई जाए, उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है।
इस बीच एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। अब आशंका जताई जा रही है कि जल्द ही अधीनस्थ चयन आयोग पर भी गाज गिर सकती है। प्रदेश में जब भी सपा की सरकार आई, इस आयोग का गठन किया गया। पूर्व की मायावती सरकार ने आयोग को भंग कर दिया था लेकिन पिछली बार सत्ता में लौटी सपा सरकार ने इसका पुनर्गठन कर दिया। चर्चा है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद अधीनस्थ चयन आयोग को फिर से भंग किया जा सकता है। चर्चा यह भी है कि सबसे अधिक गड़बड़ियां अधीनस्थ चयन आयोग में ही हुई हैं। पूर्व की सरकार लेखपाल, अमीन जैसे तमाम पदों के लिए इसी आयोग के माध्यम से नियुक्ति की गईं और आरोप लगते रहे कि ज्यादातर नियुक्तियां जुगाड़ से हुईं। अगर इसकी जांच होती हैं तो इसमें जिला स्तर के भी कई अफसर लपेटे में आ सकते हैं।