राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के ‘संघ शिक्षा वर्ग’ कार्यक्रम में संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं कार्यकारिणी सदस्य रामाशीष ने कहा कि धर्म एवं संस्कृति की रक्षा करते हुए राष्ट्र को वैभव को शिखर पर ले जाना ही संघ का उद्देश्य है। इसके बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की जरूरत है। माधव ज्ञान केंद कालेज में चल रहा यह 20 दिवसीय प्रशिक्षण इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए है।
नैनी स्थित माधव ज्ञान केंद्र इंटर कालेज में चल रहे ‘संघ शिक्षा वर्ग’ कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रामाशीष ने कहा कि अच्छे कार्यकर्ता बनने के लिए कष्टमय जीवन जीने का भी अभ्यास करना होगा। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पालन जरूर करना चाहिए। काशी प्रांत के 25 जिलों से आए स्वयंसेवकों से उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता निर्माण की सबसे छोटी पाठशाला शाखा है। शाखा में लगातार पर्याप्त समय न मिल पाने के कारण संघ शिक्षा वर्ग की आवश्यकता महसूस हुई। संघ स्थापना के बाद 1927 में ओटीसी के नाम से इसे संचालित किया गया।
वर्ष 1950 से इसका स्वरूप संघ शिक्षा वर्ग के रूप में आ गया, जो आज तक चल रहा है। उन्होंने बड़े साफ शब्दों में कहा कि लोकतंत्र का पांचवां स्तंभ संस्कृति है। इस अवसर पर प्रांत प्रचारक रमेश जी ने इस सत्र मे कार्यकर्ताओं को वर्ग में पालन किये जाने वाले कुछ विशेष नियमों की जानकारी दी। कार्यक्रम में प्रांत संघचालक डा. विश्वनाथ लाल निगम, वर्गाधिकारी चिंतामणि, प्रांत कार्यवाह बांकेलाल, सह प्रांत संघचालक अंगराज, सह प्रांत प्रचारक मुनीश, सह प्रांत प्रचार प्रमुख डा. एमजे त्रिपाठी, सर्व व्यवस्था प्रमुख गंगादत्त जोशी, कृष्ण चंद्र, जयप्रकाश, डा. सत्यपाल आदि मौजूद रहे।