महिलाओं का एक वर्ग आंदोलन जारी रखने पर अड़ा
कोरोना वायरस का खतरा बढ़ने के बाद से ही प्रशासन की ओर से आंदोलन खत्म करने की कवायद शुरू हो गई थी। एक सप्ताह पहले सामाजिक कार्यकर्ता जफर बख्त, वरिष्ठ अधिवक्ता रवि किरन जैन, शुऐब अंसारी, इरशाद उल्ला, सै.मो.अस्करी आदि ने आंदोलन समाप्त करने की अपील की।
शनिवार को प्रशासन से वार्ता के बाद आंदोलन की अगुवाई करने वाली सारा अहमद, उमर खालिद, फराज उस्मानी, जीशान रहमानी आदि ने मंच से धरना खत्म करने की घोषणा की, लेकिन महिलाओं का एक वर्ग आंदोलन जारी रखने पर अडिग रहा।
इसके बाद भी नेहा यादव, ऋचा सिंह, उबेद अंसारी, जावेद अहमद, आमिर उस्मानी आदि का धरना खत्म कराने को लेकर प्रयास जारी रहा। इसके अलावा धरना खत्म कराने के लिए एडीएम सिटी अशोक कुमार कनौजिया, एसपी सिटी बृजेश कुमार श्रीवास्तव, सिटी मजिस्ट्रेट रजनीश मिश्र आदि अफसर नेताओं से लगातार वार्ता करते रहे, जिसमें सोमवार को सफलता मिली।
वार्ता के क्रम में महिलाओं ने सिटी मजिस्ट्रेट को मांग पत्र सौंपा। इस पर सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि इस संबंध में वह निर्णय नहीं ले सकते। मांगपत्र को वरिष्ठ अफसरों के समक्ष रखा जाएगा, उनका जो निर्णय होगा पालन किया जाएगा।
डॉ.आशीष की गिरफ्तारी की निंदा
अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा की सोमवार को हुई बैठक में राष्ट्रीय महासचिव डॉ.आशीष मित्तल की गिरफ्तारी की निंदा की गई। हीरालाल का कहना था कि कैंट पुलिस बिना किसी वारंट के डॉ.मित्तल को सिविल लाइंस से उठा ले गई। उनका कहना था कि कोरोना वायरस के नाम पर सरकार जनता पर इमरजेंसी थोप रही है। उन्होंने डॉ.मित्तल की रिहाई नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।