इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा सरकार यह साबित करने ने विफल रही है कि सेवा से बाहर रहने की अवधि में वह किसी और रोजगार के जरिए जीविकोपार्जन कर रहा था। लिहाजा, याची उस अवधि के लिए पूर्ण वेतन और भत्ते का हकदार है।
कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक, देवरिया की ओर से पारित आदेश को रद्द करते हुए याची को उक्त अवधि के लिए पूर्ण वेतन और भत्ते के साथ-साथ छह प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज और याचिका की लागत के रूप में 25 हजार रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।