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राष्ट्रपति से लेकर एनजीटी तक गुहार, गंगा-यमुना बचाओ ‘सरकार’

Mon, 06 Mar 2017 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सतलुज यमुना लिंक नहर - फोटो : फाइल फोटो
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गंगा को बचाने के लिए बरसों से गुहार लगाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तक इसे लेकर गंभीर हैं। कई धार्मिक संगठन, साधु-संत तक गंगा की बदहाली पर चिंता जता रहे हैं और उसे अविरल-निर्मल करने का मुद्दा उठा रहे हैं। केंद्र सरकार का भी दावा है कि 2018 तक गंगा स्वच्छ हो जाएंगी लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों में स्थिति और खराब हुई है। अब गंगा-यमुना को बचाने के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से लेकर एनजीटी तक से गुहार लगाई गई है।
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गंगा की स्थिति हरिद्वार तक तो ठीक है लेकिन यूपी में मुजफ्फरनगर से मेरठ, बरेली, अलीगढ़, कानपुर होकर इलाहाबाद पहुंचने तक इन जिलों की फैक्ट्रियों, नालों आदि से प्रतिदिन लाखों लीटर जहरीला पानी सीधे गंगा में गिर रहा है। कानपुर की टेनरियों और इलाहाबाद के नालों का पानी सीधे गिरने से गंगा की स्थिति बेहद खराब है। यही हाल यमुना का है। सहारनपुर से यूपी में प्रवेश करने के बाद मथुरा, फिरोजाबाद होकर इलाहाबाद पहुंचने तक यमुना का पानी भी बेहद प्रदूषित हो चुका है। प्रदूषिण नियंत्रण बोर्ड के रिकार्ड के मुताबिक इलाहाबाद में वर्तमान में गंगा में बीओडी की मात्रा चार और यमुना में सात मिलीग्राम प्रतिलीटर के आसपास है, जबकि पीने योग्य जल में बीओडी का मानक दो मिलीग्राम प्रति लीटर है।

गंगा-यमुना की निर्मलता के लिए लंबे समय से प्रयासरत समाजसेवी राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की अनुश्रवण समिति के सदस्य कमलेश सिंह का दावा है कि दोनों नदियों में बीओडी की मात्रा माघ मेला के दौरान कम होती है, बाकी पूरे वर्ष यह आठ मिलीग्राम प्रतिलीटर से अधिक होता है।
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अब गर्मी बढ़ने के साथ गंगा का जलस्तर भी तेजी से कम हो रहा है तो यमुना से मेजा, बारा पॉवर प्लांट के लिए तथा पीने के लिए प्रतिदिन भारी मात्रा में पानी निकाले जाने से उसके जलस्तर में भी तेजी से कमी आ रही है। वर्ष 2018 तक गंगा को पूरी स्वच्छ करने के केंद्र मंत्री उमा भारती के दावों के बीच श्री सिंह ने माघ मेला, अर्द्धकुंभ और कुंभ मेला का हवाला देते हुए श्री सिंह ने राष्ट्रपति, पीएम, एनजीटी समेत अन्य संबंधित विभागों से दोनों नदियों को बचाने के लिए सख्ती और तेजी से काम करने की गुहार लगाई है। कहा कि गंगा को बचाने के लिए टिहरी से पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ने के साथ उसकी तलहटी में जमी सिल्ट को निकालने की जरूरत है।

यमुना नदी से प्रतिदिन 176 एमएलडी पानी निकाला जा रहा है। समाजसेवी श्री सिंह ने राष्ट्रपति, पीएम, एनजीटी को लिखे पत्र में बताया है कि बारा थर्मल पावर प्लांट के लिए प्रतिदिन 96 एमएलडी और करेलाबाग स्थित इंटेकवेल से 80 एमएलडी पानी निकाला जाता है। 80 एमएलडी पानी खुसरोबाग स्थित जलकल विभाग के प्लांट में शोधित किया जाता है, फिर शहर की बड़ी आबादी में पानी की आपूर्ति होती है। इसके अलावा मेजा पावर प्लांट के लिए 90 एमएलडी और करछना पावर प्लांट बनने के बाद वहां भी यमुना से प्रतिदिन 54 एमएलडी पानी निकालने की योजना है।

समाजसेवी कमलेश सिंह ने एसटीपी से निकलने वाले पानी को गंगा में छोड़ने के बजाए पावर प्लांट में भेजने की मांग की थी। इस संबंध में गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक ने पिछले सप्ताह श्री सिंह को बताया कि वर्तमान में एसटीपी से निकल रहा पानी पावर प्लांट में उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। नमामि गंगे के तहत नैनी एसटीपी के अपग्रेडेशन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। रकम स्वीकृत होने पर एसटीपी के पानी को पावर प्लांट में प्रयोग के लायक किया जा सकेगा। वर्तमान में एनटीपीसी मेजा, नगर निगम एवं इकाई नैनी एसटीपी के शोधित पानी को मेजा पावर प्लांट में प्रयोग के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
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