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राम जन्म भूमि न्यास के मॉडल पर मंदिर निर्माण होना तय

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The possibilities of temple construction increased on the model of Ram Janmabhoomi Nyas
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प्रयागराज। केंद्र सरकार की ओर से अयोध्या मेें भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए श्री राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र न्यास के गठन के बाद कहा जा रहा है कि अयोध्या का राम मंदिर पूर्व में गठित श्री राम जन्म भूमि न्यास के मॉडल पर ही बनाया जाएगा। विहिप भी लगातार इसी मॉडल पर मंदिर निर्माण की वकालत कर रही है। मंदिर निर्माण के लिए बनाए गए ट्रस्ट में विहिप से जुड़े सदस्यों की संख्या ज्यादा होने के कारण इस बात की पूरी संभावना है कि संबंधित ट्रस्ट श्री राम जन्म भूमि न्यास के मॉडल पर ही मंदिर बनाने की स्वीकृति देगा।
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ट्रस्ट में शामिल कई सदस्यों ने बीते माह प्रयागराज में हुए संत सम्मेलन और केंद्रीय मार्ग दर्शक मंडल की बैठक में भी भागीदारी दर्ज कराई थी। और तो और ट्रस्ट में शामिल स्वामी वासुदेवानंद ने न सिर्फ श्री राम जन्म भूमि न्यास के मॉडल पर ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की वकालत की थी बल्कि उन्होंने यह भी कहा था कि अगर राम जन्मभूमि न्यास और आंदोलन में हिस्सा लेने वाले संतों को मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी नहीं मिली तो वह न कभी अयोध्या जाएंगे और न ही सरयू स्नान करेंगे।
बुधवार को केंद्र सरकार की ओर से ट्रस्ट गठन के बाद मंदिर निर्माण से जुड़े सारे अधिकार ट्रस्ट को ही दे दिए गए हैं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए चार अलग-अलग संस्थाओं की ओर से केंद्र सरकार को आवेदन भेजे गए हैं। इसमें रामायण ट्रस्ट, इस्कॉन मंदिर, किशोर कुनाल और श्री राम जन्म भूमि न्यास शामिल है। इस बारे में विहिप केंद्रीय मंत्री अशोक तिवारी का कहना है कि चार संस्थाओं ने मंदिर निर्माण के लिए भले ही आवेदन किया हो लेकिन संगठन को उम्मीद है कि श्री राम जन्म भूमि न्यास के मॉडल को ही ट्रस्ट स्वीकार करेगा क्योंकि बीते कई वर्षों से मंदिर निर्माण को लेकर पत्थर तराशने का काम चल रहा है। इसमें तकरीबन 30 करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके हैं। यह रकम अयोध्या आंदोलन के दौरान चंदे से एकत्र की गई थी। इसके अतिरिक्त मंदिर निर्माण के लिए जितनी भी रकम की जरूरत होगी, उसके लिए प्रत्येक हिंदू से चंदा लिया जाएगा।
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