कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याची किरायेदार हैं। उन्हें नियमानुसार किए जा रहे भूमि अधिग्रहण पर आपत्ति उठाने का प्राथमिक अधिकार नहीं है। वहीं, कोर्ट ने छह मस्जिदों के संबंध में कहा कि वे वक्फ संपत्तियां हैं और उनके संरक्षण का प्राथमिक अधिकार संबंधित मुतवल्ली तथा वक्फ बोर्ड को है।
याची स्वयं इन मस्जिदों के प्रबंधन से जुड़े नहीं हैं। इसलिए इस मुद्दे पर उनकी याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती। वहीं कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के डॉ. एम इस्माइल फारूकी बनाम भारत संघ (1994) सहित पूर्व के न्यायिक निर्णयों का भी उल्लेख किया और कहा कि मस्जिद सहित कोई भी धार्मिक स्थल राज्य की भूमि अधिग्रहण शक्ति से पूर्णतः मुक्त नहीं है।
इन मस्जिदों के संरक्षण की उठाई गई थी मांग
अंजुमन इंतजामिया मस्जिद, मस्जिद रंगीले शाह, मस्जिद अली रजा खान, मस्जिद करीमुल्लाह बेग, मस्जिद निसारान और मस्जिद संगमरमर।