पीएम मोदी की घोषणा के बाद कुंभ में श्रद्धालुओं को मूल अक्षयवट का दर्शन कराने के लिए प्रशासन ने अपने स्तर से प्रयास तेज कर दिए हैं। मूल अक्षयवट तक पहुंचने के लिए रास्ता निर्माण की रूपरेखा तय की जा रही है। इसी क्रम में किले के प्रवेश द्वार पर स्थित मंदिर को शिफ्ट कराने पर विचार हो रहा है। हालांकि अभी इस बारे में स्पष्ट रूप से कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहा है।
वहीं इस बारे में मंडलायुक्त डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा है कि किला गेट पर स्थित मंदिर के पास से ही मूल अक्षयवट के दर्शन के लिए रास्ता बनाया जाएगा। सुरक्षा को देखते हुए पुलिस अक्षयवट जाने वाले मार्ग का निर्धारण अपने तरीके से करेगी।
प्रयागराज मेला प्राधिकरण, पुलिस और सेना के अफसरों के आपसी समन्वय से मूल अक्षयवट के नए मार्ग का निर्धारण कर लिया गया है। इसके लिए किले के पूर्वी प्रवेश द्वार के पास जहां से प्राचीन दीवार खोलकर रास्ता बनाने की योजना है, वहां स्थित राम, लक्ष्मण, जानकी हनुमान, राधा-कृष्ण और शिव विग्रहों का मंदिर है।
इस मंदिर की प्रतिमाओं को पास में ही उत्तरी तरफ स्थित चबूतरे पर शिफ्ट कराने की तैयारी है। कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को नए मार्ग से आसानी से प्रवेश कराने के लिए ऐसा किया जा सकता है। बुधवार या बृहस्पतिवार तक इस मंदिर को शिफ्ट कराने की चर्चा है, लेकिन प्रशासन अभी इस पर कुछ भी बोलने से बच रहा है।
अब तक की तैयारी के मुताबिक श्रद्धालुओं को ऐतिहासिक अकबर के किले के भीतर करीब आधा किमी लंबा रास्ता तय करना होगा। किले की दीवार के किनारे बन रहे इसी रास्ते पर बैरिकेडिंग होगी। इससे एक तरफ से श्रद्धालु प्रवेश करेंगे और उसी बैरिकेडिंग की दूसरी तरफ से निकलकर किले के गेट के पास वापस आएंगे। फिर, वहां से पातालपुरी और फिर किला परिसर के फाटक से सरस्वती कूप के दर्शन के लिए जाएंगे। दर्शन के पश्चात श्रद्धालु त्रिवेणी मार्ग से निकल जाएंगे। ऐतिहासिक किले में मूल अक्षयवट के नए मार्ग पर एक साथ निर्धारित संख्या में ही श्रद्धालुओं को जाने दिया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि भीड़ के एक साथ उमड़ने से अधिक दबाव के कारण किले की दीवार दरकने या कमजोर न होने पाए।
पातालपुरी के पुजारियों ने मूल अक्षय वट में पूजा-दर्शन कराने के लिए अधिकार देने की प्रशासन से गुहार लगाई है। पातालपुरी स्थित अक्षयवट के प्रबंधक व महंत रविंद्र नाथ योगेश्वर योगी ने मंगलवार को कहा कि मूल अक्षयवट में पूजा कराने का उनको अधिकार नहीं मिलेगा तो इस मंदिर पर आश्रित पांच सौ से अधिक पुजारी परिवारों की जीविका प्रभावित हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि अक्षयवट के रूप में मुगल और अंग्रेजों के शासनकाल से पातालपुरी को ही मान्यता रही है।
केंद्र सरकार अब मूल अक्षय वट खोलने की बात कर पुजारी परिवारों को नई परेशानी में डाल रही है। उन्होंने बताया कि मंडलायुक्त से मिलकर मूल अक्षयवट में पूजा का अधिकार देने का आग्रह किया गया है, लेकिन उनका कहना है कि वहां का प्रबंधन प्रयागराज मेला प्राधिकरण करेगा। अगर मूल अक्षयवट खोला गया और वहां के पुजारियों को पूजा-दर्शन कराने के अधिकार से वंचित किया गया तो इसका विरोध किया जाएगा। पुजारी मुकेश गोस्वामी ने भी कहा कि पातालपुरी में अक्षयवट दर्शन न होने से पुजारी परिवारों की जीविका अधर में पड़ जाएगी। इसलिए सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।