डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य।
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लोकसभा चुनाव में कम सीटों पर लखनऊ में मंथन के दौरान डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भाजपा कार्यालय में नाराज कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था। कहा था कि संगठन सरकार से बड़ा था, बड़ा है और बड़ा ही रहेगा। मैं डिप्टी सीएम बाद में, पहले पार्टी का कार्यकर्ता हूं। इस बयान को लेकर राजनीतिक भूचाल तो आया ही है, अब इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका भी दाखिल होने जा रही है।
याचिका की प्रति मुख्य स्थायी अधिवक्ता कार्यालय को दी जा चुकी है। मामले की सुनवाई अगले हफ्ते हो सकती है। याचिका हाईकोर्ट के अधिवक्ता मंजेश कुमार यादव की ओर से दाखिल की जा रही है। इसमें प्रदेश सरकार के अलावा केशव मौर्य और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को भी पक्षकार बनाया गया है। मांग की गई है कि प्रदेश सरकार डिप्टी सीएम के बयान पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण दे। यह बताए कि सरकार स्वंतत्र रूप से काम कर रही है या फिर भाजपा के दिशानिर्देश पर।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि डिप्टी सीएम केशव की ओर से पार्टी संगठन को प्रदेश सरकार से बड़ा बताने वाला बयान संवैधानिक पद की गरिमा को गिराने वाला है। इसके बावजूद अब तक न तो सीएम की ओर से कोई खंडन किया गया और न ही राज्यपाल की ओर से मामले का संज्ञान लिया गया। इससे प्रतीत हो रहा है कि सरकार दलगत प्रभाव के साथ भाजपा के संगठन के दिशानिर्देश पर काम कर रही है। यह स्थिति प्रदेश सरकार की निष्पक्षता, पारदर्शिता और संप्रभुता को खतरे में डालने वाली है। याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि सात आपराधिक मामले लंबित रहने के बावजूद केशव को डिप्टी सीएम जैसे संवैधानिक पद की शपथ दिलाई गई है।