पांच में से चार आरोपियों की हो गई थी मौत
अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए पांचों मुल्जिमों के खिलाफ विचारण शुरू किया जो 44 साल चला। इस दौरान सुरेश, सत्य नारायण, पुरुषोत्तम मौर्या और बच्चा मियां की मौत हो गई, जिसके बाद भी बेगुनाही साबित करने लिए विजय यादव ने कानूनी जारी रखी। लगभग चार दशक तक चली कानूनी लड़ाई और बढ़ती उम्र के बीच विजय यादव शारीरिक रूप से चलने फिरने में भी असमर्थ हो गया।
लंबी न्यायिक प्रक्रिया से लड़ते लड़ते थक चुके बुजुर्ग विजय यादव ने मंगलवार को अदालत में पेश होकर अपना गुनाह कुबूल कर लिया। उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कोर्ट से कम से कम सजा सुनने को दरख्वास्त की। हालांकि, इससे पहले वह इस मामले में कुछ दिनों तक जेल में निरुद्ध भी रह चुका था।
अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी नरेंद्र कुमार की अदालत ने बुजुर्ग मुल्जिम की ओर से जुर्म इकबाल करने की अर्जी स्वीकार कर ली। कोर्ट ने दोषी विजय यादव को जेल में बिताई गई पिछली अवधि को जोड़ते हुए मंगलवार को अदालत उठने तक हिरासत में रहने तक की कैद और दो हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न अदा करने की दशा में उसे पांच दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होता। हालांकि, मुल्जिम की ओर से जुर्माना अदा कर दिया गया और अदालत उठने के बाद बुजुर्ग विजय यादव रिहा कर दिया गया। इस तरह 44 साल चली कानूनी लड़ाई एक दिन में खत्म हो गई।