अमरनाथ झा मार्ग जार्जटाउन, प्रयागराज के निवासी वयोवृद्ध नागरिक अजय यशवंत नेहरू को शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश नहीं किया जा सका। जिससे उनके जीवित या मृत होने की गुत्थी सुलझने में अभी और वक्त लगने वाला है।
नेहरू को हाईकोर्ट ने पासपोर्ट और अन्य पहचान प्रमाणपत्रों के साथ तलब किया था। जार्जटाउन पुलिस को उन्हें सुरक्षा में अदालत लाने का निर्देश दिया था। पुलिस की ओर से बताया गया कि नेहरू बीमार हैं और एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं इसलिए अदालत नहीं लाया जा सका। इस पर कोर्ट ने उनको पासपोर्ट या अन्य पहचान पत्र के साथ 26 फरवरी को कोर्ट में उपस्थित करने का निर्देश दिया है।
सुरक्षा कारणों से यह नहीं बताया गया कि वह किस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जबकि दूसरे पक्ष का दावा है कि अजय यशवंत की मौत तीन साल पहले ही हो चुकी है। मामला करोड़ों के बंगले के विवाद का है, जिस पर दो पक्ष दावा कर रहे हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने अजय यशवंत नेहरू की याचिका पर दिया है।
एक पक्ष का आरोप है कि नेहरू 2016 में मर चुके हैं और इनके फर्जी पहचान पत्र से खाता खोला गया है। जबकि याची के वरिष्ठ अधिवक्ता आरके ओझा का कहना है कि वह जीवित हैं। वृद्ध व बीमार हैं। कोर्ट चाहे तो आ सकते है। उनकी करोड़ों की जमीन को लेकर भ्रम फैलाया गया है कि वह मर चुके हैं। कुछ लोग जमीन हथियाना चाहते हैं। एक एनआरआई विश्व प्रकाश श्रीवास्तव ने अजय से इसी जमीन बंगला नं52/38 का बैनामा करा लिया है। अपनी जमीन बेचने को प्रयागराज में है। याचिका की सुनवाई 26 फरवरी को होगी।