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खास तक सिमट कर रह गया ‘आम’

Thu, 29 Jun 2017 02:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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आम भले ही फलों का राजा है पर इस पर सिर्फ खास ही नहीं ‘आम’ का भी उतना ही हक है लेकिन बुधवार को जिला प्रशासन की पहल पर सांस्कृतिक केंद्र के इलाहाबाद हाट में आयोजित दो दिनी आम महोत्सव से ‘आम’ ही गायब था। अमरूद के शहर में आम की खेती को बढ़ावा देने की पहल स्वागतयोग्य है लेकिन पहले दिन तो इसका मकसद ही गायब रहा। मसलन इलाहाबाद में कितनी मुफीद है आम की खेती के लिए जमीन, जलवायु सहित इसके प्रोत्साहन के लिए किसानों को मदद, योजनाएं और बाजार जैसे मुद्दे नहीं दिखे। कैसे मिलेगा आम की खेती को बढ़ावा, इसकी चिंता करने वाले किसान किस कोने में रहे, पता नहीं। महोत्सव में तो विभिन्न विभागों के अफसर-कर्मचारी और स्टाल लगाने वालों से इतर शहरी दिखे।
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महोत्सव में विकास भवन सहित उद्यान विभाग, कंपनी बाग, खुसरोबाग की ओर से कई स्टाल लगाकर लंगड़ा, चौसा, सफेदा, दशहरी से लेकर हुस्न आरा तक  तकरीबन साठ से अधिक किस्में प्रदर्शित की गईं लेकिन नाम के अलावा न इनके साथ कोई विवरण रहा और न ही इन लुभाती किस्मों के पौधे ही उपलब्ध रहे। अपने वन विभाग के पास तो आम को छोड़क र पार्को में लगाने वाल बाकी सभी पौधे थे। मलीहाबाद के मालियों के पास सिर्फ चौसा, लंगड़ा, रामकेला, आम्रपाली, बंबई, लखनऊआ सफेदा, जौहरी सफेदा की किस्मों के पौधे ही रहे लेकिन तश्तरियों में लुभा रही ‘हुस्नआरा’ सहित अन्य आधुनिक प्रजातियों की किस्मों के पौधे नही।

लोगों को उम्मीद थी कि आम महोत्सव में कई अलग किस्मों वाले अच्छे और सस्ते आम मिलेंगे लेकिन बिक्री के लिए सिर्फ दो स्टाल पर कुल सात किस्में मौजूद थीं। कई लोगों ने कहा भी, इससे अच्छे तो बाजार में मिलेंगे। महोत्सव को खास के लिए खास बनाने के मकसद से चाट, फुलकी के अतिरिक्त एलचिको, कामधेनु आदि की ओर से स्टाल लगाए गए थे जहां पचास रुपये का पना और सत्तर रुपये का मैंगो शेक रहा। आम के बाजार को शिल्प मेले का रूप देते हुए हींग जयपुरी, अचार-बड़ी, पापड़, मसाले, स्वीट्स सुपारी, बुटीक, आयुर्वेदिक दवाएं, चिकन के कुर्ते, साड़ियां, हस्तशिल्प के सामान के साथ ‘फोरजी के सिम’ के स्टाल भी रहे।
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महोत्सव में आरएएफ की मौजूदगी खास रही। अफसरों की पत्नियों के संगठन कावा की ओर से आम लस्सी, आम मालपुआ, टैंगी मोमोज बनाए गए थे। इनके स्टाल पर गृह उद्योग से जुड़े उत्साद भी दिखे, बिके। वहीं आरएएफ के एक स्टाल पर सस्ते दरों पर सर्फ-साबुन, बिस्किट, पतंजलि के उत्पाद आदि उपलब्ध रहे।
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