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‘दीपदान’ में जीवंत हुई चित्तौड़गढ़ का दीपक बचाने की शौर्यगाथा

Sun, 23 Jun 2019 01:36 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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nczcc - फोटो : प्रयागराज
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डॉ. राम कुमार वर्मा की प्रसिद्ध एकांकी ‘दीपदान’ का शनिवार की शाम भावपूर्ण मंचन किया गया। इस दौरान कलाकारों ने अभिनय के जरिए चित्तौड़गढ़ के उत्तराधिकारी की रक्षा के लिए पन्ना धाय के साहस, शौर्य और कर्तव्य पालन की जीवंत प्रस्तुति की। एनसीजेडसीसी के प्रेक्षागृह में इस नाटक का मंचन बाल रामलीला समिति के वार्षिक समारोह के मौके पर किया गया। 
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बतौर मुख्य अतिथि फूलपुर की सांसद केसरी देवी पटेल, विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी और पूर्व मंत्री विक्रमाजीत पटेल की मौजूदगी में नाट्य प्रस्तुति हुई। नाटक की शुरुआत चित्तौड़गढ़ दुर्ग के एक दृश्य से होती है। पूरी कहानी कुंवर उदय सिंह के कक्ष के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। रात की दूसरी पहर कुछ समूहबद्ध महिलाओं के नृत्य और गीत से स्वर सुनाई देते हैं। उदय सिंह आकर पन्ना धाय को बताता है कि तुलजा भवानी के सामने लड़कियां नाच रही हैं और दीपदान कर रही हैं।

वह पन्ना को भी नृत्य देखने चलने की जिद करता है। वह समझाती है कि चित्तौड़गढ़ के कुलदीपक के तौर पर उसे इस तरह का नाच गाना देखने के लिए नहीं जाना चाहिए। उसी दौरान अंत:पुर की परिचारिका सामी आकर पन्ना धाय को बताती है कि वनवीर ने सोते हुए राणा सांगा के सीने में तलवार भोंककर हत्या कर दी है। उसे आशंका थी कि वह यहां आकर उदय की भी राज्य का उत्तराधिकारी समझ कर हत्या न कर दे। पन्नाधाय उदय को टोकरी में रखकर पत्तियों से ढंककर बाहर निकाल लेती है और उसकी जगह अपने पुत्र चंदन को सुलाकर चादर से ढंक देती है।
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उधर, राणा सांगा की हत्या के बाद वनवीर उदय सिंह के कक्ष में आता है और तलवार के प्रहार से उसकी हत्या कर देता है। पन्नाधाय मूर्छित हो जाती है, लेकिन कमरे में दीपक की मंद लौ जलती रहती है। पन्ना धाय की भूमिका रति श्रीवास्तव ने की। वनवीर के रूप में अतुल राय, सोना के रूप में दिव्या, उदय सिंह के रूप में निष्ठा राय ने अभिनय किया। निर्देशन प्रभाकर सिंह का था। 
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