इलाहाबाद(ब्यूरो)। केंद्र एवं सरकार की ओर से गर्भवती, प्रसूताओं व नवजातों के लिए बेशक दर्जन भर कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर करोड़ों खर्च किए जा रहे हों लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, डॉक्टर जच्चा और बच्चा की सेहत को लेकर कतई फिक्रमंद नजर नही आ रहे हैं। डॉक्टरों की घोर लापरवाही की एक बानगी जिला महिला अस्पताल (डफरिन) में बृहस्पतिवार को समय देखने को मिली।
प्रसव पीड़ा से कराह रही सोरांव निवासी महिला को अस्पताल के डॉक्टरों ने भर्ती करने से ही मना कर दिया। जबकि महिला और उसके साथ आए परिजन गिड़गिड़ाते रहे। आरोप है कि धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ नहीं पसीजे तो इस व्यवहार से हताश महिला डफरिन गेट पर ही बैठ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक महिला ने अस्पताल के गेट पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। इस घटना से अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच र्गई। अस्पताल के गेट पर प्रसूता महिला के बच्चा जनने की जानकारी डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ को हुई तो सभी भागकर मौके पर पहुंचे।
पहले प्रसूता को भर्ती करने से मना करने वाले खुद को बचाने के लिए महिला व नवजात को तत्काल अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया। जहां उसका इलाज किया जा रहा है। इस घटना से अस्पताल में इलाज कराने पहुंची महिलाओं व तीमारदारों में खासा रोष रहा। वहीं घटना के संबंध में जब सीएमएस डॉ. पार्वती सिंधी से जानकारी ली गई तो उन्होंने ऐसी किसी घटना की जानकारी होने से ही इंकार कर दिया। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व यमुनापार के एक पीएचसी के डॉक्टरों द्वारा प्रसव कराने से मना करने पर गर्भवती ने बीच सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया था। इस घटना की विभागीय जांच की गई थी। जांच के बाद कई डॉक्टरों व पैरा मेडिकल पर विभागीय कार्रवाई भी की गई थी।