उमेश पाल हत्याकांड के फरार शूटर गुड्डू मुस्लिम, साबिर और अरमान का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। आने वाले 24 फरवरी को उमेश पाल की हत्या हुए साल भर हो जाएंगे। लेकिन इन तीनों शूटरों का अब तक कोई सुराग नहीं है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक पांच-पांच लाख के इन तीनों इनामी शूटरों की गिरफ्तारी के लिए अब नए सिरे से प्रयास किए जा रहे हैं। प्रयागराज पुलिस के अलावा एसटीएफ भी उन्हें पकड़ने का प्रयास कर रही है।
उमेश पाल और दो सिपाहियों की हत्या में वांछित गुड्डू मुस्लिम, साबिर और अरमान अन्य आरोपियों के साथ हत्या करते सीसीटीवी फुटेज में दिखे थे। सभी आरोपियों पर शासन ने पांच-पांच लाख रुपये इनाम की घोषणा की थी। बाद में असद और गुलाम को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। लेकिन गुड्डू, साबिर और अरमान का कुछ पता नहीं चला था। गुड्डू तो अतीक के बहनोई अखलाक के घर पर पांच मार्च को सीसीटीवी में दिखा भी लेकिन साबिर और अरमान की आज तक कोई खबर नहीं मिली। गुड्डू मुस्लिम की भी अंतिम लोकेशन पुलिस अखलाक के घर में ही मिली थी। पुलिस ने उनकी तलाश में मुंबई से लेकर बिहार, उड़ीसा से लेकर तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, हरियाणा समेत तमाम प्रदेशों में छापेमारी की। यहां तक कि एक टीम को नेपाल भी भेजा गया था।
वहां से भी टीम खाली हाथ लौट आई। इस बीच कई बार यह अफवाह उड़ी कि गुड्डू मुस्लिम और साबिर अतीक की पत्नी शाइस्ता के साथ हैं। शाइस्ता पर भी पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम रखा है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ इन्हें पकड़ने में सिर्फ पुलिस के हाथ नाकामी लगी है। एसटीएफ की कई यूनिट पांच-पांच लाख के तीनों इनामियों की तलाश कर रही है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के घरों की कुर्की भी कर दी। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक शूटरों को पकड़ने के लिए नए सिरे से प्रयास किए जा रहे हैं। उनके परिवार वालों को ही नहीं दूर दराज के रिश्तेदारों और दोस्तों पर भी नजर रखी जा रही है। बिना पैसों के इतने दिन फरार रहना मुमकिन नहीं है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि तीनों को आर्थिक मदद कहां से मिल रही है। पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। जल्द ही उसका रिजल्ट दिखेगा।
शाइस्ता और जैनब भी बनीं पहेली
अतीक की पत्नी शाइस्ता और अशरफ की पत्नी जैनब भी फरार हैं। पर्दे में रहने वाली दोनों महिलाएं पुलिस के लिए एक पहेली बन गई हैं। पुलिस ने शाइस्ता की तलाश में जिले के कछारी इलाकों में कई हफ्तों तक अभियान चलाया था लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। इसी तरह केस में जैनब का नाम आने के बाद उसका भी कोई सुराग नहीं मिल पाया।