इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्रीय कारागार वाराणसी में आजीवन कारावास की सजा काट रहे मऊ के सिद्धदोष बंदी सत्येंद्र सिंह की समयपूर्व रिहाई की मांग पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सरकार तीन सप्ताह में अनुपालन हलफनामा दाखिल कर बताए कि 16 वर्ष से अधिक सजा काट लेने के बावजूद बंदी की रिहाई पर अब तक निर्णय क्यों नहीं लिया गया। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने सत्येंद्र सिंह की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि सत्येंद्र सिंह के खिलाफ मऊ के हलधरपुर थाने में 1995 में हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले में जनपद न्यायालय ने 22 मई 2003 को सत्येंद्र सिंह को आजीवन कारावास और 16 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके बाद सत्येंद्र सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की, जिसे सात दिसंबर 2004 को स्वीकार करते हुए उन्हें बरी कर दिया गया था।
हालांकि, राज्य सरकार की ओर से दाखिल अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 26 फरवरी 2016 को हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए सत्र न्यायालय की ओर से दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा। वहीं, सत्येंद्र सिंह अब 16 वर्ष से अधिक की सजा काट चुका है और जेल में उसका आचरण संतोषजनक रहा है। इस आधार पर वरिष्ठ अधीक्षक, केंद्रीय कारागार वाराणसी की ओर से समयपूर्व रिहाई के लिए शासन को निर्धारित प्रारूप में फॉर्म-ए भेजा गया था। इसके बावजूद शासन स्तर पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।