पुलिस ने मई 2021 में आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके खिलाफ तौफिक ने हाईकोर्ट का रुख किया। कोर्ट ने समझौते की दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कहा, हाईकोर्ट को समझौते के आधार पर मुकदमा रद्द करने का अधिकार है, लेकिन दुष्कर्म जैसे मामलों में समझौते की बात कल्पना से परे है। मौजूदा मामले में धर्म परिवर्तन आस्था के लिए नहीं, बल्कि विवाह का आधार बनाने या उससे बचने के उद्देश्य से किया गया था। इसे सद्भावनापूर्ण नहीं माना जा सकता। गैरकानूनी धर्मांतरण भी गंभीर अपराध है।
याची ने कहा-हो गया है समझौता, मर्जी से बदला धर्म
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि दोनों पक्षकारों के बीच 2023 में समझौता हो गया है। वह मर्जी से धर्म परिवर्तन कर अयान संग रह रही थी। लिहाजा, ट्रायल कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की जानी चाहिए।
सरकार बोली-दुष्कर्म व धर्मांतरण समाज के खिलाफ
राज्य सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि दुष्कर्म व धर्मांतरण समाज के खिलाफ अपराध है। समझौता केवल निजी प्रकृति के मामलों में ही पोषणीय है।