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High Court : अपराध की गंभीरता किशोर की जमानत खारिज करने का आधार नहीं, जुवेनाइल बोर्ड का आदेश रद्द

Wed, 30 Jul 2025 01:53 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीरता किशोर की जमानत अर्जी खारिज करने का आधार नहीं हो सकती है। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने किशोर की जमानत अर्जी खारिज करने के किशोर न्याय बोर्ड के 13 मार्च 2024 के आदेश और विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) के 23 मई 2024 के आदेश को रद्द कर दिया।
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीरता किशोर की जमानत अर्जी खारिज करने का आधार नहीं हो सकती है। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने किशोर की जमानत अर्जी खारिज करने के किशोर न्याय बोर्ड के 13 मार्च 2024 के आदेश और विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) के 23 मई 2024 के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने आजमगढ़ निवासी किशोर को दुष्कर्म और पॉक्सो मामले में जमानत दे दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की एकल पीठ ने दिया।

आजमगढ़ के कोतवाली थाने में किशोर पर दुष्कर्म, पॉक्सों सहित विभिन्न आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है। ट्रायल कोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उसने हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण अर्जी दाखिल की।

किशोर के अधिवक्ता ने दलील दी कि कथित घटना की तारीख को किशोर की आयु 13 साल, 8 महीने और 22 दिन थी। वह एक अक्तूबर 2023 से बाल संरक्षण गृह में है। किशोर को झूठा फंसाया गया है। उसका आपराधिक इतिहास नहीं है। मुकदमे के जल्द समाप्त होने की कोई उम्मीद नहीं है। किशोर न्याय अधिनियम के तहत जमानत से इन्कार करने के लिए कोई भी आधार उपलब्ध नहीं है। शासकीय अधिवक्ता ने आपराधिक पुनरीक्षण का विरोध किया।

कोर्ट ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत किशोर की जमानत तभी खारिज की जा सकती है जब कोई ऐसा आधार हो कि उसकी रिहाई उसे किसी ज्ञात अपराधी के संपर्क में लाएगी। रिहाई से किशोर को नैतिक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक खतरे में डालेगी या न्याय के उद्देश्य विफल हो जाएंगे। कोर्ट ने शिव कुमार उर्फ साधु बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले का हवाला दिया। इसके साथ ही तमाम पहलुओं पर विचार करते हुए किशोर की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।

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