भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण केंद्र।
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हरदोई की सांडी दहर झील की वनस्पतियों का पहली बार सर्वे किया जाएगा। यह जिम्मा भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के मध्य क्षेत्रीय केंद्र, प्रयागराज की टीम करेगी। बारिश के बाद एक साल में सर्वे पूरा कर लेगी। इससे वहां की वानस्पतिक विविधता का पता तो लगेगा ही, विलुप्त हो रही प्रजातियों का संरक्षण भी संभव हो सकेगा।
हरदोई के बिलग्राम तहसील स्थित सांडी दहर झील 308.5 हेक्टेयर में है। यहां पक्षी विहार भी है। बड़ा भू-भाग दलदल है और पशु-पक्षियों के लिए मुफीद भी। इसे 26 सितंबर 2019 को रामसर साइट का दर्जा देते हुए इसे संरक्षित घोषित किया गया था। वहां सैकड़ों प्रकार की वनस्पतियां माैजूद हैं। पहली बार उन वनस्पतियों का भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण मध्य क्षेत्रीय केंद्र की टीम सर्वे करेगी। मध्य मध्य क्षेत्रीय केंद्र की वनस्पतिज्ञ डॉ. नितिषा श्रीवास्तव ने बताया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से यह प्रोजेक्ट मिला है। एक वर्ष में सर्वे पूरा करेंगे। देखेंगे कि कितने की प्रकार के पेड़, पाैधे, झाड़ियां आदि हैं। उनके नमूने भी लेंगे। वहां कुछ नई वनस्पतियां मिलने की भी संभावना है।
क्या है रामसर साइट
नम व दलदली भूमि वाले इलाकों को संरक्षण देने के लिए दो फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में सम्मेलन हुआ था। तभी से दलदली भूमि वाले स्थलों को रामसर साइट घोषित किया जाने लगा। देश भर में कुल 82 रामसर साइट हैं। इनमें 10 साइट यूपी में हैं। यह स्थल पूरे साल नम रहते हैं। इससे जैव विविधता कायम रहती है।