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दिखने लगा तीन साल पहले आई बाढ़ का नजारा

Sat, 20 Aug 2016 01:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। बैराजों से गंगा-यमुना में छोड़ा जा रहा पानी और यूपी एवं एमपी में हो रही बारिश अगर थमी नहीं तो इलाहाबादियों को तीन साल पहले आई बाढ़ की विभीषिका जैसे हालात झेलने पड़ सकते है। उत्तराखंड, पश्चिमी यूपी और मध्यप्रदेश में हुई बारिश के चलते प्रमुख बैराजों से गंगा और यमुना में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। कछारी इलाका और उसके आसपास के मोहल्ले डूबे हुए हैं। कई दिनों से सभी स्लूज गेट बंद हैं। स्लूज गेट बंद होने के कारण शहर में हो रही बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है। शुक्रवार को गंगा के लाल निशान को पार करने के बाद लोगों के दिलों की धड़कने और बढ़ गई। 
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गंगा ने शुक्रवार की सुबह लाल निशान पार कर लिया, जबकि यमुना के देर रात उसे पार करने की आशंका है। उधर बैराजों सेे छोड़ा जा रहा पानी भी लगातार इलाहाबाद पहुंच रहा है। ऐेसे में दोनों ही नदी के शनिवार को 85 मीटर के आंकड़े को पार करने की आशंका है। बता दें कि दोनों ही नदियों का इलाहाबाद में खतरे का निशान 84.734 मीटर है। इस बात की भी आशंका है कि गंगा और यमुना में इस बार अप्रत्याशित उफान आ सकता है।
अगर ऐसा हुआ तो शहर में 2013 या फिर वर्ष 1978 में आई बाढ़ वाले हालात बन सकते हैं। जिला प्रशासन भी इस आशंका से सहमा हुआ है। हालात देखते हुए मंडलायुक्त और जिलाधिकारी ने अफसरों को प्रभावित इलाकों में कैंप करने का भी निर्देश दे दिया है। बता दें कि वर्ष 2013 में दोनों ही नदियों का जलस्तर 87 मीटर के आसपास पहुंच गया था, जबकि 1978 में आई बाढ़ के दौरान गंगा फाफामऊ में 88.390 मीटर एवं यमुना नदी 87.990 मीटर तक पहुंच गई थी। 
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