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इलाहाबाद विवि हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र प्रताप का निधन

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ब्रेन हैमरेज के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए हिंदुस्तानी एकेडमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो योगेंद्र प्रताप सिंह ने सोमवार की सुबह उपचार केदौरान अंतिम सांस ले ली। वह 82 वर्ष के थे। वह अपने पीछे चार पुत्र और दो पुत्रियों का भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। अंतिम संस्कार मंगलवार की सुबह दारागंज श्मशान घाट पर किया जाएगा।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष व हिंदुस्तानी एकेडमी के अध्यक्ष रहे योगेंद्र प्रताप सिंह को ब्रेन हैमरेज के बाद रविवार को बालसन चौराहे के पास एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉ ओपी सिंह के निर्देशन में चिकित्सकों की टीम उनके उपचार में जुटी रही, लेकिन सोमवार की सुबह सात बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन की जानकारी मिलने के बाद इविवि के कई प्रोफेसर उनके आवास पर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। वे एक आलोचक के साथ ही रचनाकार और संपादक भी थे। पत्राचार संस्थान के निदेशक के अलावा भारतीय हिंदी परिषद के अध्यक्ष पदों पर भी उन्होंने दायित्व निभाया था।
हिंदी साहित्य में प्रो योगेंद्र के योगदान को खासतौर से काव्यशास्त्र एवं रामकथा साहित्य सबंधी कृतियों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। साहित्यकार रविनंदन सिंह ने बताया कि उन्होंने अत्यंत परिश्रम से विश्व रामकथा साहित्य कोष तैयार कराया, जो उनकी एक बड़ी उपलब्धि है। उनकी सबसे बड़ी खासियत थी कि आत्म प्रशंसा से दूर रहकर निरंतर रचनाकर्म करते रहे। उन्होंने लगभग 90 कृतियों की रचना की। उनका अचानक चले जाना हिंदी जगत के लिए अत्यंत दु:खद है।
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26जनवरी 1939 को उनका जन्म जिले के कोटवा नामक गांव में हुआ था। उनके पुत्र उपन्यासकार डॉ कीर्ति कुमार ने बताया कि बीती रात हृदयाघात के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बड़े पुत्र इंदुप्रकाश सिंह मेरठ में अधीक्षण अभियंता के पद पर तैनात हैं। उनके आने के बाद मंगलवार की सुबह प्रशासन की अनुमति से दारागंज घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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