गंगा और यमुना की बाढ़ से जिले के तीन हजार किसानों की खेती और जमीन ही नहीं डूबे, बल्कि उनके सपने भी डूब गए हैं। इस बार सबसे ज्यादा विकट स्थिति किसानों की है। दो माह के अंतराल में तीन बार आई बाढ़ में 290 गांवों के किसानों की तकरीबन दो हजार हेक्टेयर में बोई गई फसलें चौपट हो गई हैं।
किसानों के अनुसार, जिले में पहली बार बाढ़ 19 जुलाई को आई जिसका असर 23 जुलाई तक बना रहा। दूसरी बार दो अगस्त से 10 अगस्त तक बाढ़ का असर रहा। तीसरी बार 25 अगस्त को एक बार फिर पानी बढ़ने से फसलों के साथ उनके सपने भी डूब गए हैं।
30 तक किसान करा सकते फसल बीमा
उप निदेशक कृषि पवन विश्वकर्मा ने बताया कि 30 अगस्त तक किसान मुआवजा लेने के लिए सफल बीमा करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि 60 गांवों के किसानों को अधिक नुकसान हुआ है। क्षति का आकलन फसल बीमा के प्रतिनिधि, कृषि विभाग और स्थानीय लेखपाल तीन अधिकारियों की टीम कर रही है। इसके बाद ही तय हो पाएगा कि नुकसान कितना हुआ हैं। उन्होंने बताया कि पचास प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर ग्राम पंचायत फसल बीमा से कवर होती है।