स्वामी प्रसाद मौर्य का भी नहीं हुआ कार्यक्रम
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य भी प्रचार के लिए नहीं आए। इसके अलावा पूर्व सांसद एवं सपा के राष्ट्रीय महासचिव सलीम इकबाल शेरवानी भी चुनाव के दौरान कहीं भी नहीं दिखे। बताया जा रहा है कि पार्टी का एक खेमा विधायक इंद्रजीत सरोज को प्रभारी बनाए जाने से नाराज था। यह भी कहा गया कि अजय श्रीवास्तव को इंद्रजीत सरोज की वजह से ही टिकट मिला।
स्थानीय नेताओं का कम सहयोग मिलने की वजह से लखनऊ प्रदेश मुख्यालय से यहां सपा के वरिष्ठ नेता केके श्रीवास्तव को भेजा। केके ने आते ही चुनाव की कमान संभाल ली, उन्हें भी चुनाव तैयारी के लिए दिन गिनती भर के ही मिले।
हालांकि सपा के मीडिया प्रभारी दान बहादुर मधुर ने इस चुनाव में मिली हार को चुनाव आयोग की साजिश बताया। कहा कि मतदाता सूची से सपा समर्थकों के नाम काटे गए। पोलिंग बूथ की भी सही जानकारी नहीं दी गई। सपा समर्थक नाम न होने पर मायूूस होकर पोलिंग सेंटर से लौटे।
सदन में घटे सपा के पार्षद, एक नंबर से तीसरे पर पहुंची पार्टी
पिछले निकाय चुनाव में सपा के सर्वाधिक 24 पार्षद चुनाव मैदान में जीते थे। इस वजह से नगर निगम सदन में सपा सबसे बड़ा दल बनकर उभरा, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। निकाय चुनाव 2017 के मुकाबले इस बार वार्ड की संख्या 80 से बढ़कर 100 हो गई। 20 वार्ड बढ़ने के बाद उम्मीद थी कि सपा के पार्षद सदन में बढ़ेंगे, लेकिन पार्षद बढ़ने की बजाय इस बार संख्या घट गई। सपा सिर्फ 16 वार्ड ही जीत सकी। हालांकि मेयर चुनाव में सपा का मत प्रतिशत जरूर बढ़ा। पिछले चुनाव में सपा को 20.84 प्रतिशत मत मिले, इस बार उसका मत प्रतिशत 21.49 प्रतिशत हो गया।
प्रयागराज की जनता ने जो प्यार दिया उसके लिए सभी का आभार है। चुनाव में कम समय मिला, लेकिन हर समाज के लोगों ने स्नेह दिया। - अजय कुमार श्रीवास्तव, मेयर प्रत्याशी, सपा।