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उपलब्धि : दीक्षांत ने दिखाई नारी सशक्तिकरण की राह, राज्य विवि के दीक्षांत समारोह में बोलीं राज्यपाल आनंदी बेन

Sat, 06 Mar 2021 12:02 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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prayagraj news : रज्जू भैया राज्य विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों को मेडल प्रदान करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल। - फोटो : prayagraj
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प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मेधावियों को 41 स्वर्ण पदक बांटे गए। इनमें 10 छात्र और 31 छात्राएं हैं। यानी छात्राओं के खाते में 75.61 फीसदी स्वर्ण पदक आए। मेधावियों को पदक प्रदान करने के बाद दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रहीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि दीक्षांत ने नारी सशक्तिकरण की राह दिखाई है। उच्च शिक्षा के प्रति नारी शक्ति का रुझान तेजी से बढ़ रहा है, जो उनके सशक्तिकरण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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उन्होंने कहा कि देश को आत्मनिर्भर बनाने में राज्य विश्वविद्यालय अपना योगदान दें। उन्होंने विश्वविद्यालयों में रोजगार परक शिक्षा देने पर जोर दिया और कहा कि वर्तमान में भारत एक विश्व व्यापी ‘ज्ञान-अर्थव्यवस्था’ के रूप में विकसित हो रहा है। हमें आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना है। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन और उच्चस्तरीय शोध पर आधारित होती है।

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prayagraj news : रज्जू भैया राज्य विवि के दीक्षांत समारोह में मेधावियों को मेडल प्रदान करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल। - फोटो : prayagraj
यह विश्वविद्यालय विश्व के श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में तभी अपना स्थान बना पाएगा, जब शिक्षण कार्य और शोध की गुणवत्ता में निखार आए। उन्होंने पदक पाने वाले मेधावियों को बधाई देते हुए कहा कि आप सभी को अपनी उपलब्धियों पर गर्व होगा, लेकिन जीवन में आप जो भी उपलब्धि प्राप्त कर रहे हैं, उसके साथ नैतिकता, ईमानदारी, करुणा और दया जैसे गुणों को अपनाना होगा।

जीवन में आपका लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए और उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने नई शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए कहा कि यह नीति प्राचीन भारत की शैक्षिक भव्यता को पुनर्जीवित करते हुए विश्व स्तरीय बनाने का सार्थक कार्यक्रम है। यह चिंतन का विषय है कि आखिर वे कौन सी विशेषताएं भारतीय शिक्षा में थीं, जिसकी वजह से संपूर्ण विश्व से विद्यार्थी तक्षशिला एवं नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन करने के लिए आते थे। उन्होंने विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से सामुदायिक जुड़ाव और सेवा, पर्यावरण शिक्षा एवं मूल्य आधारित शिक्षा को शामिल किए जाने पर जोर दिया। कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से कराए जा रहे अनुसंधान में इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध होने चाहिए। 
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