फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती पर बढ़ा विवादों का साया

विज्ञापन
The controversy over LT grade teacher recruitment increased
विज्ञापन
मुकदमा दर्ज होने से मचा हड़कंप, आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
विज्ञापन

जीव विज्ञान में चयनित 595 अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर मंडरा रहा संकट
प्रयागराज। एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती पर विवादों का साया बढ़ गया है। जीव विज्ञान की परीक्षा के दौरान ओएमआर आंसर शीट बदले जाने की आशंका पर दो अभ्यर्थियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने से हड़कंप मचा है। अभ्यर्थी सवाल उठा रहे हैं कि परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के साढ़े तीन माह बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को एफआईआर क्यों दर्ज करानी पड़ी। इस बारे में आयोग के अफसर भी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
ओएमआर आंसर शीट की जांच के दौरान दोनों की ओएमआर शीट में ओवरराइटिंग, राइटिंग में अंतर व अन्य अनियमितताएं सामने आने पर आयोग की ओर से यह कार्रवाई की गई। जीव विज्ञान सहित 15 विषयों में एलटी ग्रेड शिक्षकों के 10768 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा 29 जुलाई 2018 को आयोजित की गई थी। आयोग अब तक अलग-अलग तिथियों में 13 विषयों का अंतिम चयन परिणाम जारी कर चुका है, जबकि हिंदी और सामाजिक विज्ञान का रिजल्ट पेपर आउट प्रकरण में फंसा हुआ है। जीव विज्ञान विषय का अंतिम चयन परिणाम आयोग ने पिछले साल दो नवंबर को जारी किया था। जीव विज्ञान के कुल 595 पदों पर भर्ती होनी है। इनमें पुरुष शाखा के 336 और महिला शाखा के 259 पद शामिल हैं।
विज्ञापन

इन पदों पर अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों के अभिलेखों का सत्यापन भी पूरा हो चुका है लेकिन आयोग ने अब तक चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की संस्तुति शासन को नहीं भेजी है। आयोग ने जिन 13 विषयों का परिणाम घोषित किया है, उनमें से केवल तीन विषयों संगीत, कृषि और वाणिज्य विषयों के चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की संस्तुति भेजी है। अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से सवाल उठा रहे थे कि आयोग बाकी विषयों की संस्तुति भेजने में देर क्यों कर रहा है। अब जीव विज्ञान विषय की परीक्षा के मामले में आयोग की ओर से एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद तस्वीर कुछ साफ हो रही है।
हालांकि आयोग की इस कार्रवाई के बाद चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति फंस सकती है। अभ्यर्थी का कहना है कि आयोग ने ओएमआर आंसरशीट की जांच के बाद ही रिजल्ट जारी किया था। अगर कोई गड़बड़ी थी तो रिजल्ट किस आधार पर जारी कर दिया और परिणाम जारी होने के तीन माह बाद तक कार्रवाई क्यों नहीं की? अभ्यर्थियों की ओर से उठाए गए सवालों का आयोग के पास फिलहाल कोई जवाब नहीं है। आयोग के सचिव जगदीश कहना है कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
एसआईटी जांच भी हो सकती है वजह
एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में हिंदी और सामाजिक विज्ञान विषय में पेपर आउट प्रकरण में एसआईटी जांच चल रही है। एसटीएफ भी आयोग से परीक्षा संबंधी तमाम दस्तावेज अपने साथ ले गई है। चर्चा यह भी है कि एसआईटी जांच में यह मामला सामने आया और जब एसआईटी ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई तो आयोग को मामले में मुकदमा दर्ज कराना पड़ा।
परीक्षा के दौरान लगे थे गड़बड़ी के आरोप
एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान केंद्रों में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। तमाम अभ्यर्थियों ने आरोप लगाए थे कि जिन्होंने एक क्रम से फॉर्म भरे, उन्हें नंबर भी क्रमवार आवंटित कर दिए गए और परीक्षा कक्ष में उन्हें आगे-पीछे बैठा दिया गया। हालांकि सिटिंग प्लान पर सवाल उठने के बाद आयोग ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था।
विज्ञापन

नियुक्ति की संस्तुति भेजने में क्यों हो रही देर
आयोग अब तक 13 विषयों में चयनित अभ्यर्थियों के अभिलेखों का सत्यापन करा चुका है लेकिन इनमें से दस विषयों के अभ्यर्थियों की फाइलें अब भी आयोग में पड़ी हैं। चयनित अभ्यर्थी सवाल उठा रहे हैं कि आयोग उनकी नियुक्ति की संस्तुति भेजने में विलंब क्यों कर रहा है, जबकि सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। आयोग की इस कार्य प्रणाली से अभ्यर्थियों को अपनी नौकरी पर संकट मंडराता नजर आ रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें