The condition of the saint sitting on hunger strike worsened
प्रयागराज। भूमि आवंटन और सुविधाओं की मांग के लिए मेला प्रभारी अधिकारी के शिविर के सामने अनशन पर बैठे संतों की बारिश में भीगने से शुक्रवार को तबीयत खराब हो गई। स्वामी दीनानंद के सिर व कमर में दर्द शुरू हो गया। खुले आसमान के नीचे अनशन के दूसरे दिन भी मेला प्रशासन का कोई प्रतिनिधि उनसे वार्ता के लिए नहीं पहुंचा। इससे नाराज संतों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
संत हितकारिणी हृदय नारायण सेवा संस्थान के बैनर तले नौ साधु-संत प्रभारी मेलाधिकारी शिविर कार्यालय के सामने बृहस्पतिवार से ही भूख हड़ताल पर हैं। शुक्रवार को संतों ने मेला प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि बारिश के दौरान उनको प्रशासन ने तिरपाल तक की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई। रात में भीगने से स्वामी दीनानंद की तबीयत खराब हो गई। उनके कपडे़ और बिस्तर भीग गए हैं। रात में संतों ने खुद के खर्चे पर तिरपाल खरीद कर बारिश से बचाव किया। संतों का आरोप है कि प्रशासन ने उनको जमीन और सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई हैं। कुंभ के दौरान उनको भूमि भी दी गई थी। लेकिन इस बार संतों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
महंत अंबुज कुमार पांडेय, जय सीताराम असहाय वृद्ध सेवा संस्थान के संत दूधनाथ शास्त्री, जय सीताराम तप एवं ज्ञान आश्रम के संत राम बहादुर शास्त्री, स्वामी दीनानंद राजेश्वरी कल्याण के स्वामी दीनानंद, रामचंद सेवा संस्थान के स्वामी भीम महाराज, हरिओम सेवा शिविर के अमृत लाल, मां शक्तिपीठ की साध्वी मधु तिवारी, आश्रम अंजनीगढ़ के त्रिलोचनानंद महाराज और शैक्षणिक सेवा न्याय राघवानंद के बलदेवानंद परमहंस ने मेला प्रशासन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है।