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डिप्टी जेलर नरेंद्र के हत्यारे को ढेर करने वाले जांबाज को मेडल के लिए काटने पड़ रहे चक्कर, हाईकोर्ट में लगाई गुहार

Thu, 15 Jul 2021 08:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • एक लाख के इनामी दुर्दांत अपराधी का एनकांउटर करने वाले इंस्पेक्टर ने हाईकोर्ट से लगाई गुहार
  • राष्ट्रपति पदक की संस्तुति के बाद भी दफ्तरों में ही घूम रही है मेडल देने की फाइल
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allahabad high court - फोटो : social media
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विस्तार
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डिप्टी जेलर नरेंद्र तोमर, बागपत के खेखड़ा नगर पंचायत अध्यक्ष हरेंद्र सिंह सहित दर्जनों हत्याओं, लूट और डकैती के आरोपी दुर्दांत अपराधी धर्मेंद्र उर्फ लाला को एनकाउंटर में ढेर करने वाले जांबाज शैलेश तोमर को अपने अदम्य साहस और बहादुरी का पुरस्कार पाने के लिए अफसरों के दफ्तरों से लेकर हाईकोर्ट तक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। नरेंद्र को उनकी बहादुरी के लिए राष्ट्रपति का पुलिस मेडल दिए जाने की संस्तुति 2017 में ही कर दी गई थी। शैलेश ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मेडल दिए जाने का निर्देश देने की मांग की है। शैलेश की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय ने प्रदेश और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। 
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नरेंद्र की ओर से याचिका दाखिल करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि शैलेश तोमर ने क्राइम ब्रांच गौतम बुद्ध नगर में इंस्पेक्टर रहते हुए दुर्दांत अपराधी धर्मेंद्र उर्फ लाला का 26 सितंबर 2012 को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। धर्मेंद्र पर मेरठ में डिप्टी जेलर नरेंद्र द्विवेदी, नगर पालिका खेखड़ा बागपत के चेयरमैन हरेंद्र सिंह सहित दर्जनों हत्याएं, अपहरण, लूट और फिरौती जैसे मामले दर्ज थे। वह सुशील मुच्छ गैंग का शार्प शूटर और सुपारी किलर था तथा पुलिस कस्टडी से फरार चल रहा था। 

इस बहादुरी के कार्य के लिए नरेंद्र तोमर को राष्ट्रपति का पुलिस पदक देने के लिए 2017 में संस्तुति की गई। पुलिस अधिकारियों के बीच इसे लेकर दर्जनों बार पत्राचार हुआ। शैलेश की फाइल केंद्र सरकार को भेजने के लिए उत्तर प्रदेश शासन के पास भेज दी गई। सरकारी वकील का कहना था कि शासन उनके मामले पर विचार कर रहा है। जल्दी ही इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
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वरिष्ठ अधिवक्ता का कहना था कि भारत सरकार ने 10 मार्च 1951 को अधिसूचना जारी कर सेवा के दौरान अदम्य साहस, शौर्य का परिचय देने और अपनी जान जोखिम में डाल कर कार्य करने वाले पुलिस कर्मचारियों को राष्ट्रपति मेडल से पुरस्कृत करने का निर्णय लिया है। याची के खिलाफ एनकाउंटर के बाद मानवाधिकार आयोग और अन्य जांचे पूरी हो चुकी हैं और सभी में एनकाउंटर सही पाया गया है। इसके बाद ही उनको मेडल दिए जाने की संस्तुति की गई। इसके बावजूद 2017 से उनके मामले में कोई निर्णय नहीं लिया गया। न ही अवार्ड के तौर पर मिलने वाला एक लाख रुपये का इनाम ही उनको दिया गया है। कोर्ट ने इस मामले में डीजीपी यूपी, राज्य सरकार और केंद्र सरकार को पूरी जानकारी के साथ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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