The answer to the formation of the GST tribunal
जीएसटी अधिकरण के गठन पर जवाब तलब
प्रयागराज। जीएसटी अधिकरण के गठन में हो रही देरी पर हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से एक और मामले में जवाब तलब किया है। इससे पूर्व इसी मामले में हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ भी सरकार से जवाब मांग चुकी है। अधिकरण नहीं होने से जीएसटी से संबंधित मामलों में बड़ी संख्या में याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल हो रही हैं। कोर्ट ने पूछा है कि दो साल पहले कानून बनने के बावजूद राज्य जीएसटी अधिकरण का गठन क्यों नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने दो सप्ताह में केंद्र व राज्य सरकार से जानकारी मांगी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह ने मेसर्स के पैन फ्रे ग्रेंस प्राइवेट लिमिटेड गाजियाबाद की याचिका पर दिया है। याचिका टैक्स पेनाल्टी को लेकर विभागीय अपील पर पारित आदेश के खिलाफ दाखिल की गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार कंपनी के हलफनामे का दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। याची कंपनी का कहना है कि उसका पान मसाला लदा ट्रक गुड़गांव से गाजियाबाद लाया गया था। ट्रक पहुंचने में एक दिन का विलंब हुआ जिस पर जीएसटी विभाग ने ट्रक जब्त कर टैक्स के बराबर पेनाल्टी लगाई है। याची का कहना है कि ड्राइवर बीमार हो गया था। सो जाने के कारण गाजियाबाद आने में देरी हुई । दो ट्रिप नहीं की है। मगर विभाग ने उसकी दलील नहीं मानी। कोर्ट ने कहा राज्य अधिकरण होता तो ऐसे मामले हाईकोर्ट नहीं आते।
भारत सरकार के अधिवक्ता कृष्ण जी शुक्ल ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने राज्य अपीलीय अधिकरण प्रयागराज में गठन का प्रस्ताव जीएसटी काउंसिल को भेजा है। जिस पर केंद्र सरकार विचार कर रही है। इसी मामले में अवध बार एसोसिएशन की जनहित याचिका को तय करते हुए लखनऊ खंडपीठ ने प्रयागराज में राज्य अधिकरण गठन के प्रस्ताव को रद्द कर पूर्व में लखनऊ में गठन के प्रस्ताव के तहत केंद्र व राज्य सरकार को फैसला लेने का निर्देश दिया है। जिसके विरुद्ध केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने पर विचार कर रही है।
इसी मामले में विचाराधीन टॉर्क फार्मास्युटिकल केस की सुनवाई न्यायमूर्ति भारती सप्रू तथा न्यायमूर्ति आरआर अग्रवाल की खंडपीठ 19 जुलाई को करेगी।