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मकानों के ध्वस्तीकरण के मामले में पीडीए की कार्रवाई को चुनोती

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प्रयागराज। प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) की ओर से शहर में मकानों को गिराए जाने की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। योगेंद्र कुमार पांडेय की ओर से जनहित याचिका बुधवार को हाईकोर्ट में दाखिल की गई। याचिका में दो मुद्दों पर कोर्ट से राहत की मांग की गई है। पहला अवैध बताए जा रहे मकानों को गिराने पर रोक लगाई जाए। दूसरा बिना नक्शा पास हुए बने मकानों का ध्वस्तीकरण बंद किया जाए।
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याची के अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव और सुनीता शर्मा ने कहा कि प्रयागराज में बहुत से मकान पुराने समय के बने हुए हैं। 1977 से पहले नक्शा पास कराना अनिवार्य नहीं था। पीडीए को मकान तोड़ने की बजाय ऐसे मकान मालिकों से नक्शा पास कराने के लिए समन शुल्क लेकर उन्हें वैध घोषित करना चाहिए। इससे सरकार को भी करोड़ों रुपये की आमदनी होती। लेकिन पीडीए लंबे समय से रह रहे लोगों को राहत देने की बजाय उन्हें बेघर करने पर तुला है। याचिका में रोड मैप बनाए जाने पर सवाल खड़े किए गए हैं। कहा गया है कि पीडीए पूर्व में हाईकोर्ट के समक्ष दिए गए बयान को भी नहीं मान रहा है। पीडीए ने पूर्व में हाईकोर्ट के समक्ष कहा था कि शहर में 22 फीट चौड़ी सड़क होनी चाहिए। पीडीए उस बात को अब नहीं मान रहा है और जहां 70 फीट चौड़ी सड़क है, वहां भी मकानों का ध्वस्तीकरण कर रहा है।
याची ने यूपी अर्बन प्लॉनिंग डेवलपमेंट एक्ट और पब्लिक प्रिमाइसेस एक्ट में उल्लिखित विधिक प्रावधानों का पालन करने पर बल दिया है। याचिका में कहा गया है कि पीडीए गाढ़ी कमाई से बनाए गए गरीबों के मकानों को विधिक रूप देने की बजाय उसे ध्वस्त करने में लगा है। यह गलत है। पीडीए लोगों के मौलिक अधिकारों का भी हनन कर रहा है। याचिका में प्रमुख सचिव नगर विकास, उपाध्यक्ष प्रयागराज विकास प्राधिकरण, नगर निगम और लोक निर्माण विभाग को पक्षकार बनाया गया है।
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ध्वस्तीकरण के मामले में पूरक हलफनामा दाखिल करने का आदेश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुलेमसराय में अवैध मकानों के ध्वस्तीकरण के मामले में याची विनीत गुप्ता को पूरक हलफनामा दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए आगे की तिथि तय कर दी। याची विनीत गुप्ता ने हाईकोर्ट में पीडीए की कार्रवाई को चुनौती दी है। पीडीए ने इलाके में 35 से अधिक मकानों को ध्वस्त कर दिया है। तीन मकान बचे हुए हैं। याची की ओर से तर्क दिया गया है कि ये मकान पुराने हैं। यह अवैध नहीं है। कोर्ट ने याची के तर्कों को स्वीकार करते हुए मामले में स्थगन आदेश पारित किया है। कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई करते हुए याची को दो सप्ताह में पूरक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
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