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गजब : मुद्दई मिला न आरोपी, 27 साल चला मुकदमा, अब पत्रावली दाखिल दफ्तर

Fri, 01 Sep 2023 03:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार गौतम की अदालत में यह मामला वर्ष 1996 में आया था। घटना 30 साल पहले की है। तब, लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण मानव जीवन को संकट में डालने की एफआईआर सूबेदार यादव के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में दर्ज की गई थी।
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court - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इलाहाबाद जिला न्यायालय मेें 27 साल से लंबित आपराधिक मामले में न तो मुल्जिम पेश हुआ और न अभियोजन पक्ष की ओर से एफआईआर लिखाने वाले मुद्दई को ही पेश किया जा सका। पुलिस ने अदालत को जानकारी दी कि आरोपी के अंकित पते पर उसके नाम का कोई व्यक्ति नहीं रहता। कोर्ट ने 30 साल से फरार सूबेदार यादव के खिलाफ स्थाई वारंट जारी कर पत्रावली को दाखिल दफ्तर करने का आदेश दिया है।

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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार गौतम की अदालत में यह मामला वर्ष 1996 में आया था। घटना 30 साल पहले की है। तब, लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण मानव जीवन को संकट में डालने की एफआईआर सूबेदार यादव के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में दर्ज की गई थी। आरोपी का नाम-पता भी सिविल लाइंस थाना क्षेत्र बताया गया था। रिपोर्ट का 1996 में कोर्ट ने संज्ञान ले लिया। उसके बाद सुनवाई की तारीखें लगने लगीं। 27 साल बीतने के बाद भी पुलिस न तो आरोपी को पेश कर सकी और न ही अभियोजन पक्ष कोई साक्ष्य पेश कर पाया।

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शिकायतकर्ता को भी पुलिस नहीं खोज पाई

हद यह भी कि एफआईआर दर्ज करने वाले शिकायतकर्ता को भी पुलिस अदालत के समक्ष पेश नहीं कर पाई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सिविल लाइंस पुलिस से आख्या तलब की तो पता लगा कि पत्रावली पर आरोपी सूबेदार यादव का जो पता अंकित है, वहां उस नाम का कोई व्यक्ति रहता ही नहीं।

अदालत ने कहा कि यह मामला प्राचीनतम श्रेणी का है। आरोपी की गिरफ्तारी की संभावना भी दिखाई नहीं दे रही है। इसके साथ कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ स्थाई वारंट जारी करते हुए पत्रावली दाखिल दफ्तर करने का आदेश दे दिया।
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