शिकायतकर्ता को भी पुलिस नहीं खोज पाई
हद यह भी कि एफआईआर दर्ज करने वाले शिकायतकर्ता को भी पुलिस अदालत के समक्ष पेश नहीं कर पाई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सिविल लाइंस पुलिस से आख्या तलब की तो पता लगा कि पत्रावली पर आरोपी सूबेदार यादव का जो पता अंकित है, वहां उस नाम का कोई व्यक्ति रहता ही नहीं।
अदालत ने कहा कि यह मामला प्राचीनतम श्रेणी का है। आरोपी की गिरफ्तारी की संभावना भी दिखाई नहीं दे रही है। इसके साथ कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ स्थाई वारंट जारी करते हुए पत्रावली दाखिल दफ्तर करने का आदेश दे दिया।