तीन वर्ष पूर्व घोषित शिक्षक भर्ती का परिणाम घोषित नहीं होने से स्कूलों में प्रमुख विषयों के शिक्षक नहीं
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में खाली टीजीटी-पीजीटी भर्ती परीक्षा-2016 की उत्तरकुंजी परीक्षा होने के छह महीने पूरे होने के बाद भी जारी नहीं कर सकी है। उत्तरकुंजी जारी करने के बाद परीक्षार्थियों से आपत्ति लेकर उसके निस्तारण में तो लगता है आयोग पूरा साल खत्म कर देगा। चयन बोर्ड की धीमी कार्यशैली पर शासन की ओर से अध्यक्ष एवं सदस्यों को तलब किया गया है। उत्तरकुंजी जारी नहीं होने से परीक्षा परिणाम को लेकर परीक्षार्थियों का इंतजार बढ़ता जा रहा है। शिक्षक भर्ती का परिणाम घोषित नहीं होने से प्रदेश के अधिकांश सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रमुख विषयों के शिक्षकों के पद खाली हैं।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से पांच जून 2016 को सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के लिए टीजीटी के 7950 पदों और पीजीटी (प्रवक्ता) के 1344 पदों केलिए भर्ती की घोषणा की गई थी। भर्ती की घोषणा के बाद मार्च 2017 में प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद चयन बोर्ड का नए सिरे से गठन किया गया। चयन बोर्ड के गठन के बाद सितंबर 2018 में टीजीटी-पीजीटी परीक्षा कराने की तैयारी की गई थी, इसी बीच यूपी बोर्ड टीजीटी-पीजीटी में शामिल कुछ विषयों को हटा दिए जाने के बाद परीक्षा स्थगित करके उसे फरवरी एवं मार्च 2019 में पूरा किया गया।
चयन बोर्ड की ओर से प्रवक्ता के 1344 पदों के लिए परीक्षा एक और दो फरवरी 2019 को कराई गई जबकि टीजीटी के 7950 पदों के लिए परीक्षा आठ एवं नौ मार्च को हुई थी। परीक्षा के छह महीने बाद भी चयन बोर्ड की ओर से टीजीटी-पीजीटी परीक्षा की उत्तरकुंजी तक जारी नहीं हो सकी है। उत्तरकुंजी जारी होने के बाद परीक्षार्थियों से आपत्ति मांगी जाएगी। परीक्षार्थियों की आपत्ति निस्तारण के बाद संशोधित उत्तर कुंजी जारी किए जाने के बाद कापियों का मूल्यांकन होगा। ऐसे में लगता है कि चयन बोर्ड का टीजीटी-पीजीटी-2016 का परिणाम घोषित करने में छह महीने से अधिक समय लगेगा।
चयन बोर्ड की ओर से 2016 की शिक्षक भर्ती का परिणाम घोषित नहीं किए जाने से एक महीने से परीक्षा में शामिल प्रतियोगी धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके बाद भी चयन बोर्ड का कोई भी अधिकारी परीक्षार्थियों से बात करने आगे नहीं आया है। चयन बोर्ड की धीमी कार्यशैली से परेशान होकर प्रदेश सरकार के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों को बातचीत करने के लिए 28 अगस्त को बुलाया है।