उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से 25 जनवरी को हुई टीजीटी परीक्षा के सात प्रश्नों के उत्तर पर हिंदी विशेषज्ञ एवं उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष कौशल किशोर त्रिपाठी ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि चयन बोर्ड की ओर से जारी सात प्रश्नों के उत्तर गलत हैं। हिन्दी के 125 प्रश्न हैं, प्रत्येक प्रश्न के लिए 3.4 अंक तय हैं। इस प्रकार कुल सात प्रश्नों का कुल 24 अंक बनता है।
विशेषज्ञ का कहना है कि सीरीज ‘ए’ के प्रश्न-4 में उपजाऊ का विलोम ऊसर दिया है, जबकि सही उत्तर अनउपजाऊ माना है, इसके समर्थन में विशेषज्ञ हरदेव बाहरी के हिंदी व्याकरण पुस्तक को आधार बनाते हैं। प्रश्न-15 में अमीर खुसरो किस नाम से जाने जाते थे, बोर्ड ने इसका उत्तर तोता-ए-हिन्द दिया है, जबकि सही उत्तर तूतिए हिन्दी माना है, इसके समर्थन में पुनीत राय की पुस्तक वस्तुनिष्ठ हिंदी को आधार माना है।
प्रश्न-24 में समस्त पृथ्वी से संबंध रखने वाला का उत्तर बोर्ड ने सर्वज्ञ दिया है, जबकि विशेषज्ञ के अनुसार सही उत्तर सार्वभौमिक है। इसके समर्थन में हरदेव बाहरी के हिंदी व्याकरण पुस्तक को आधार बनाते हैं। प्रश्न-51 में कौन देशज प्रत्यय का शब्द नहीं है, इसका उत्तर बोर्ड ने उच्चतर दिया है जबकि सही उत्तर फर्राटा माना है। इसके समर्थन में हरदेव बाहरी के हिंदी व्याकरण पुस्तक का आधार बनाते हैं।
प्रश्न-61 में मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार किसे कहा जा सकता है, इसका उत्तर बोर्ड ने मनोहर श्याम जोशी दिया है, जबकि सही उत्तर जैनेंद्र माना है। इसके समर्थन में डॉ. नगेंद्र के हिंदी साहित्य के इतिहास को आधार बनाया गया है। प्रश्न-93 में भी समरस थे... घना था, को बोर्ड ने शांत रस माना है जबकि सही उत्तर विशेषज्ञ ने शृंगार रस माना है। इसके साथ विशेषज्ञ ने भाषा की सार्थक लघुतम इकाई का उत्तर बोर्ड ध्वनि मानता है जबकि सही उत्तर शब्द बताया गया है। इसी प्रकार चयन बोर्ड की परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों ने सीरीज ए, बी, सी, डी के जारी उत्तर को ही अलग-अलग बताया है। उनका कहना है कि दो सीरीज में एक ही प्रश्न के अलग-अलग उत्तर हैं।
टीजीटी संगीत की चयन बोर्ड की ओर से जारी आंसर-की पर परीक्षा में शामिल दीप सिंह ने आपत्ति जताई है। इस परीक्षार्थी का कहना है कि सीरीज ए में प्रश्न संख्या 28, 64, 67, 74, 75, 76, 92, 95, 103 के उत्तर सही नहीं हैं। इसके समर्थन में इस अभ्यर्थी ने संगीत के प्रामाणिक लेखकों डॉ. स्वतंत्र शर्मा, ठाकुर जयदेव सिंह, वसंत, डॉ. भगवंत कौर की पुस्तकों का हवाला दिया है।