मेला बसाने में 1723.16 करोड़ से अधिक धनराशि खर्च होगी। इससे अस्थायी काम कराए जाएंगे। यह महाकुंभ आयोजन पर कुल खर्च होने वाली राशि का 26 फीसदी है। जमीन समतलीकरण के साथ मेला क्षेत्र में बसावट का काम भी तेज हो गया है। परेड मैदान और बांध व गंगा के बीच में अस्थायी निर्माण शुरू हो गए हैं। अखाड़ों को भूमि आवंटन के बाद झूंसी की तरफ भी टेंट लगाने का काम शुरू होगा।
पिछले दिनों महाकुंभ शीर्ष कमेटी की बैठक में महाकुंभ आयोजन के वित्तीय प्रबंधन पर बात हुई, साथ ही मंजूरी दी गई। इसके अनुसार महाकुंभ के मद्देनजर कुल 4994.69 करोड़ रुपये के स्थायी काम कराए जा रहे हैं। इनमें से ज्यादातर काम पूरे हो चुके हैं या अंतिम चरण में हैं। इसी क्रम में अस्थायी कार्यों के लिए 1723.16 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसी धनराशि से मेला क्षेत्र में पेजयल, बिजली, 30 पांटून पुल, 2,69,000 चेकर्ड प्लेटों से 488 किमी अस्थायी सड़कों का निर्माण सहित अन्य कार्य होंगे।
महाकुंभ के बाद दूसरे जिलों को भेजे जाएंगे 833 करोड़ के उपकरण
महाकुंभ के अंतर्गत 4994.69 करोड़ रुपये के स्थायी काम कराए जा रहे हैं। इसमें बड़ी राशि उपकरणों की खरीद पर खर्च की जाएगी। इनमें अस्थायी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, मेला क्षेत्र के लिए ट्रांसफार्मर, 250 वाटर एटीएम समेत कई अन्य उपकरण शामिल हैं। आयोजन के बाद इन उपकरणों का उपयोग प्रयागराज या अन्य जिलों में किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, महाकुंभ के बाद 833 करोड़ के उपकरण अन्य जिलों के स्थानीय निकायों को दिए जाएंगे।
केंद्र से 2,100 करोड़ रुपये की मांग
महाकुंभ आयोजन के लिए केंद्र सरकार से 2,100 करोड़ रुपये की मांग की गई है। मुख्य सचिव ने इसका प्रस्ताव केंद्र को भेजा है। शीर्ष समिति के अलावा बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री के निजी सचिव की अध्यक्षता में बैठक में भी इस पर चर्चा हुई थी।