लू के थपेड़ों और तपिश की वजह से मंगलवार को लोग बेहाल रहे। पारा 47.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सूबे में सिर्फ बांदा का तापमान 48 डिग्री यहां से अधिक रहा। स्थानीय चक्रवाती हवाओं का दबाव बढ़ने पर शाम को कुछ देर के लिए बारिश जरूर हुई, लेकिन राहत की बजाय उमस ने परेशानी बढ़ा दी। मौसम विज्ञानियों के अनुसार अभी दो-तीन दिन और इसी तरह का मौसम बना रहेगा। बताया कि पश्चिम विक्षोभ उठ चुका है और उसके यहां बृहस्पतिवार या शुक्रवार तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, मानसून 15 जून के बाद ही आएगा।
मंगलवार को पारा रिकार्ड स्तर पर रहा। अधिकतम तापमान 47.6 तथा न्यूनतम 29 डिग्री दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि मंगलवार इस सीजन का सबसे गर्म रहा। सोमवार को भी अधिकतम तापमान 47.1 तथा न्यूनतम 28.5 डिग्री था। भारतीय मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 28, 29 और 30 मई को धूप-छांव की स्थिति रहेगी, लेकिन बादल रुकेंगे नहीं और तापमान से कोई राहत नहीं मिलेगी।
वहीं मंगलवार शाम को तेज हवाओं के साथ कुछ देर के लिए बारिश हुई, लेकिन उमस बढ़ने से गर्मी और बढ़ गई। इविवि के प्रोफेसर एचएन मिश्रा का कहना है कि यह स्थानीय चक्रवर्ती हवाओं का नतीजा था। आगे भी बादल बनेंगे, लेकिन हवाएं टिकने नहीं देंगी।
ऐसे में फिलहाल दो-तीन दिनों तक तापमान में गिरावट की उम्मीद नहीं है। विश्वविद्यालय के ही मौसम विज्ञानी डॉ.शैलेंद्र राय का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो गया है। उसके यहां दो-तीन दिनाें में पहुंचने की उम्मीद है। इससे आंधी के साथ बारिश होगी, तब तापमान में कुछ गिरावट हो। उनका यह भी कहना है कि इस समय इतना अधिक तापमान सामान्य बात है। पिछले वर्ष भी 30 मई को 48.60 डिग्री तापमान पहुंच गया था। इससे पहले 1994 में 30 मई को ही पारा 48.4 डिग्री तक पहुंचा था। उन्होंने बताया कि इससे मानसून की सक्रियता बढ़ेगी।