प्रयागराज। नगर निगम के अस्थायी रैन बसेरों में निराश्रितों के लिए मुकम्मल व्यवस्था के दावे हैं, लेकिन ठंड से बचाव के उपाय नहीं दिखे। जमीन पर मैटिंग, बिछाने को गद्दा और ओढ़ने को खोलीदार रजाई दी गई पर टिन शेड के रैनबसेरों में रुके लोग गलन वाली ठंड से परेशान रहे। लोहिया मार्ग पर रैन बसेरे में बस्ती से आकर रुके यात्री ने बताया कि टीन ठंडात है, रजाई में करेजा कांपत है साहेब...। 20 और दस-दस लोगों के ठहरने की क्षमता वाले इन अस्थायी रैन बसेरों में 25 गद्दा-रजाई के सेट रखवाए गए हैं। पानी के लिए बाल्टी, मग, अलाव के लकड़ी अलग से पहुंचाई गई है। निर्देश हैं कि पानी पीने के लिए गर्म करके दिया जाए। रैन बसेरों के भीतर अलाव जला नहीं सकते और बाहर जलाकर बैठने की हिम्मत अधिकांश केयरटेकर जुटा नहीं पाते। नतीजा सामने दिखा सिर छिपाने के लिए पहुंचे लोग रात भर ठंड से कांपते रहे।
बुधवार रात 11 बजे अस्थायी रैन बसेरों की हकीकत देखने निकली तो कुछ को छोड़कर अधिकतर रैन बसेरों में गिनती के लोग ठहरे मिले। सिविल लाइंस में पत्थर गिरिजाघर के सामने बगल बनाए गए रैन बसेरा रात 11.40 बजे तक खाली था। वहां केयरटेकर भोला बाहर अलाव जलाकर बैठा था। बगल एक रिक्शा चालक आग तापते हुए टमाटर भूनता दिखा।
लोहिया मार्ग पर दो अस्थायी रैन बसेरे बनाए गए हैं। यहां दरवाजा खटखटाने पर शिवमूरत ओझा ने पूछा कौन... फिर संतुष्टि के बाद कुंडी खोल दी। भीतर छह लोग लेटे थे। जाग सभी रहे थे, रजाई से सिर सिर्फ दो लोगों ने सिर बाहर निकाला। वे बोले, ठंडी बहुत है, रजाई कुछ राहत दे रही हैं। बाहर बैठकर अलाव तापने की हिम्मत नहीं है।
पास में ही दूसरी पटरी पर शिव मूरत ने ही अपने साथी केयरटेकर को आवाज दी। इसके बाद गोपाल कश्यप ने झट दरवाजा खोला। पूछने पर बताया कि 12 लोग आज शाम आए हैं। इनमें सोनभद्र के गुड्डू और तीन साथियों के साथ बस्ती से आए गुरु प्रसाद ने ठंड से ठिठुरन की बात अपनी क्षेत्रीय भाषा में बताई।
अस्थायी रैन बसेरों के टिन शेड छूकर महसूस हो रहा था कि वहां रहने वालों को ठंड किस कदर सता रही होगी। गुरु प्रसाद बोले बल्टी का पानी पियय की हिम्मत न हय, हाथ सेंकय बाहर जाई तो जाई कैसे, दोनों स्थानों पर पानी का टैंकर, बाल्टी, मग और क्षमता से अधिक रजाइयां थीं, पर जाड़ा दूर नहीं हो रहा था। अन्य रैन बसेरों में ठहरे लोगों ने बताया कि दिक्कत सिर्फ ठंड से ही है।
बस अड्डा सिविल लाइंस, मधवापुर सब्जी मंडी, बैरहना सीमेंट्री रोड, गऊघाट में पुराने यमुना पुल के पास, जीरो रोड बस अड्डे के सामने, लीडर रोड और पीडी टंडन पार्क के पास अस्थायी रैन बसेरों में पांच से 15 लोग मिले। रेलवे स्टेशन ओर बस अड्डों के पास बनाए गए रैन बसेरों में लोग आते-जाते रहे।
स्थायी रैन बसेरों में भी गरम पानी नहीं
अल्लापुर में बीएसएनएल आफिस के निकट, हैजा अस्पताल परिसर, नूरूल्ला रोड, यमुना बैंक रोड समेत आठ स्थायी 27 अस्थायी रैन बसेरे बनाए गए हैं। मकर संक्रांति पर पांच अस्थायी रैन बसेरों की संख्या बढ़ा दी गई। स्थायी रैन बसेरों में ठहरने वालों की संख्या क्षमता के अनुरूप रही। कहीं 20 तो कहीं 50 यात्री मिले। गरम पानी की व्यवस्था नहीं थी। संसाधन थे, लेकिन केटरटेकरों ने लापरवाही दिखाई।